”पाटन, 05 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनपद पंचायत पाटन के सभापति प्रणव शर्मा ने समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं पौधारोपण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस मनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी के माध्यम से जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। वर्तमान समय में बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में लगातार गिरावट एवं जल स्रोतों के सूखने जैसी समस्याएं हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। यदि आज हम नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियों को पानी और स्वच्छ पर्यावरण के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
प्रणव शर्मा ने कहा कि “जल ही जीवन है” केवल एक नारा नहीं बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार है। क्षेत्र में भूजल स्तर में लगातार गिरावट आने के कारण कई स्थानों पर पेयजल संकट की स्थिति निर्मित हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक घर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाए। घरों, विद्यालयों, कार्यालयों एवं सार्वजनिक भवनों में सोखता गड्ढा (Soak Pit), रिचार्ज पिट तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जाए ताकि वर्षा का पानी सीधे जमीन में जाकर भूजल स्तर को बढ़ा सके।किसानों से विशेष आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में” रोकने की दिशा में कार्य करना समय की आवश्यकता है।
प्रत्येक किसान अपने खेत में डबरी, छोटा तालाब अथवा जल संग्रहण संरचना का निर्माण करे। यदि किसान अपनी भूमि का मात्र 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण हेतु समर्पित करें तो शेष 95 प्रतिशत भूमि की उत्पादकता एवं जल उपलब्धता को सुरक्षित रखा जा सकता है।उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के साथ-साथ फसल चक्र परिवर्तन भी आवश्यक है। मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, उड़द, अरहर एवं तिल जैसी कम पानी वाली फसलों को अपनाने से जल की बचत होगी, खेती की लागत कम होगी तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रणव शर्मा ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि पेड़ न केवल पर्यावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि वर्षा चक्र को संतुलित रखने, मिट्टी के संरक्षण एवं भूजल संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए।उन्होंने कहा कि जल संकट और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियों का समाधान केवल शासन-प्रशासन के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, किसान, युवा, महिलाएं, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठनों को मिलकर सामूहिक प्रयास करना होगा।
अंत में उन्होंने कहा—“आइए, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि जल की हर बूंद बचाएंगे, अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे, वर्षा जल का संचयन करेंगे और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध एवं हरित भविष्य का निर्माण करेंगे। जल है तो कल है, हरियाली है तो खुशहाली है।
