इच्छा-शक्ति, ज्ञान-शक्ति और क्रिया-शक्ति—इन तीनों शक्तियों का समन्वित स्वरूप ही माँ महालक्ष्मी ः पं. केशव शर्मा

श्रीमद् भागवत कथा ः ग्राम राघोनवागांव में 9 दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

देवरीबंगला/ सुधाकर परिवार तथा ग्रामीणों के सहयोग से नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथावाचक खामभाट के पं.केशव शर्मा (छोटे महाराज) है। उन्होंने कथा के चौथे दिन श्री विष्णु व श्री लक्ष्मी का वर्णन करते हुए बताया कि च विष्णुपत्नी च शक्तित्रयायरूपिणी समुद्रराजसुतायै च सन्तुष्टायै नमो नमः॥ महालक्ष्मी वही देवी हैं जो सम्पूर्ण सृष्टि में धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि का संचार करती हैं। वे भगवान विष्णु की अर्धांगिनी होकर सृष्टि के पालन और संतुलन में उनकी दिव्य शक्ति के रूप में कार्य करती हैं। इच्छा-शक्ति, ज्ञान-शक्ति और क्रिया-शक्ति—इन तीनों शक्तियों का समन्वित स्वरूप ही माँ महालक्ष्मी हैं। वे क्षीरसागर से प्रकट हुईं, इसलिए समुद्रराज की पुत्री कही जाती हैं, और स्वभाव से अत्यंत करुणामयी हैं। जो भक्त श्रद्धा, विश्वास और पवित्र भाव से उनकी उपासना करता है, उस पर वे शीघ्र प्रसन्न होकर कृपा करती हैं। उनकी कृपा से केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं, अपितु संतोष, शांति और आत्मिक ऐश्वर्य भी प्राप्त होता है। ऐसी दयामयी, मंगलमयी और सर्वसुखदायिनी श्री माँ महालक्ष्मी को कोटि-कोटि नमन। पं. शर्मा ने बताया कि जब जब धरती पर अधर्म बढ़ता है तब तब भगवान अवतार लेते हैं। और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं।

भगवान श्री कृष्ण ने कंस व श्री राम ने रावण का वध किया। उन्होंने अन्य देवी देवताओं के अवतारों का वर्णन पर सुंदर व्याख्यान दिया। उन्होंने व्यास पीठ से वामन अवतार, ध्रुव चरित्र, जङभरत कथा तथा प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाई। कथा के परीक्षित संगीता नीरज सुधाकर है। श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के प्रमुख यजमान चंद्रप्रभा सुधाकर है।

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