डॉ राजीव चौधरी को सहज योग ध्यान एवं सतत विकास पर शोध के लिए डी. लिट्. उपाधि प्रदान

रायपुर, 24 जून 2025पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के शारीरिक शिक्षा विभाग में प्रोफेसर एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. राजीव चौधरी को उनके मौलिक एवं अनुसंधान आधारित कार्य के लिए डॉक्टर ऑफ लेटर्स (D.Litt.) की उपाधि प्रदान की गई है।

यह उपाधि उन्हें “लैंगिक दृष्टिकोण से सतत विकास पर सहज योग ध्यान के प्रभाव” विषय पर किए गए उनके अनुसंधान कार्य के लिए प्रदान की गई है, जो ध्यान विज्ञान, लिंग अध्ययन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के संगम पर आधारित है।

इस शोध का उद्देश्य सहज योग ध्यान के अभ्यास का उन मूल्यों पर प्रभाव जानना था, जो सतत विकास की आधारशिला हैं—जैसे स्वतंत्रता, समानता, एकता, सहिष्णुता, प्रकृति के प्रति सम्मान और साझा उत्तरदायित्व। साथ ही इसमें लिंग आधारित अंतर का भी विश्लेषण किया गया।

डॉ. चौधरी द्वारा अपनाई गई शोध विधि एक 2×2 फैक्टोरियल डिज़ाइन पर आधारित थी, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य के 400 युवाओं को शामिल किया गया, जिन्हें ध्यानाभ्यास करने वाले एवं न करने वाले और पुरुष व महिला वर्गों में समान रूप से विभाजित किया गया।अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों में पाया गया कि सहज योग ध्यान का नियमित अभ्यास करने वाले प्रतिभागियों ने सतत विकास के सभी छह मूल्यों में उच्च अंक प्राप्त किए।

विशेष रूप से स्वतंत्रता और सहिष्णुता जैसे आयामों में लिंग के आधार पर उल्लेखनीय अंतर देखे गए। हालांकि, लिंग और अभ्यास के मध्य अंतःक्रियात्मक प्रभाव सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं पाए गए, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि सहज योग के लाभ लिंग की सीमाओं से परे हैं।इस शोध में दो-मार्गीय फैक्टोरियल एनोवा (ANOVA) एवं प्रभाव आकार (Effect Size) जैसे उन्नत सांख्यिकीय उपकरणों का प्रयोग किया गया, जिससे निष्कर्षों की वैधता एवं प्रभावशीलता सिद्ध हुई। यह निष्कर्ष न केवल व्यक्ति के मूल्यों में परिवर्तन की संभावना को दर्शाते हैं, बल्कि एक अधिक न्यायपूर्ण एवं सतत समाज की दिशा में सहज योग के योगदान को भी रेखांकित करते हैं।

डॉ. चौधरी ने अपनी संस्तुतियों में सहज योग को शैक्षिक पाठ्यक्रमों, कार्यस्थल स्वास्थ्य कार्यक्रमों, समुदाय जागरूकता अभियानों तथा नीति निर्धारण में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया है। यह शोध संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप व्यक्तिगत उत्थान के साथ-साथ सामाजिक कल्याण हेतु ध्यान को एक सशक्त साधन के रूप में प्रस्तुत करता है

।आज के समय में जब मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय संकट और सामाजिक असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियाँ हमारे सामने हैं, ऐसे में डॉ. चौधरी का यह शोध एक दूरदर्शी मार्गदर्शिका है, जो ध्यान के माध्यम से आंतरिक रूपांतरण को बाह्य सतत जीवनशैली से जोड़ने की प्रेरणा देता है।

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