भारतमाला परियोजना बाप बताओ-अन्यथा श्राद्ध करो, जैतु साव मठ की भूमि तत्काल मंदिर के नाम वापस हो-पं विजय झा

* रायपुर। छत्तीसगढ़ राजधानी को भ्रष्टाचार के मामले में कलंकित करने वाले भारतमाला परियोजना में भ्रष्टाचार और घोटाले सर्वोच्च शिखर पर पहुंच रहे हैं। किंतु जैतु साव मठ की भूमि का बिकना आश्चर्यजनक है। राजधानी निवासी कर्मचारी नेता पं विजय कुमार झा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ी में कहावत है बाप बताओ अन्यथा श्राद्ध करो‌। किसी भी मंदिर या ट्रस्ट की भूमि सार्वजनिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिना कलेक्टर व पंजीयक सार्वजनिक न्यास की अनुमति के विक्रय संभव नहीं है। यदि जैतु साव मठ की भूमि विक्रय के लिए कलेक्टर द्वारा अनुमति दी गई है, तो उस तत्कालीन कलेक्टर के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई हो और यदि कलेक्टर द्वारा अनुमति नहीं दिया गया और बिना अनुमति के विक्रय हुआ है, तो यह 420 का प्रकरण है। इसके लिए दोषी लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए‌। श्री झा ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव जिन्होंने भारतमाला परियोजना को स्थल निरीक्षण करने जाकर स्थिति से अवगत हुए हैं, उनसे मांग की है कि तत्काल जो भी कार्यवाही होगी उसके पहले रायपुर के ऐतिहासिक जैतू साव मठ जिसके महंत स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण दास जो मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष थे‌। उस मंदिर की भूमि को तत्काल राजस्व अभिलेखों में जैतु साल मठ के नाम आज ही दर्ज कराया जाए‌। श्री झा ने कहा है कि एक तरफ देश में वक्फ संशोधन अधिनियम लाकर वक्फ की संपत्ति की सुरक्षा की दुहाई दी जा रही है। दूसरी ओर केवल रायपुर के ही अनेक मंदिरों की संपत्ति गोलमाल की गई। भू माफिया, दलालों के अलावा स्वयं सरकार ने अनेक बार मंदिरों की जमीन को बंदर बांट किया है।जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण पाटन तहसील के महामाया जामगांव तथा जैतु साव मठ के धरमपुरा में आईएएस कॉलोनी का निर्माण,दूधाधारी मठ की भूमि पर बस स्टैंड का निर्माण प्रत्यक्ष उदाहरण है। सर्वोच्च न्यायालय के डबल बेंच का आदेश है कि किसी भी मंदिर की भूमि का विक्रय यह हस्तांतरण हुआ है। उसे निरस्त कर तत्काल वापस मंदिर के नाम किया जाए इसका पालन छत्तीसगढ़ राज्य में भी होना चाहिए।

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