विद्यालय ग्रंथालय में वेद, शास्त्र, पुराण, उपनिषद, भागवत एवं अन्य प्रकार के धार्मिक एवं पुरातन ग्रंथों का संकलन व संग्रहण किया गया है व पुरातन पद्धति के अनुसार आसन में बैठ कर ग्रंथों का अध्ययन पठन एवं वाचन की सुविधा प्रदान की जा रही है | विद्यालय के विद्यार्थियों में पुरातन व सनातन पद्धति के अनुसार पाठ एवं जप करने के लिए एवं विद्यार्थियों को हमारे प्राचीन ग्रंथों कि जानकारी उपलब्ध कराने हेतु इस प्रकार का अभिनव प्रयास किया गया है |विद्यालय कि ग्रंथपाल सुश्री भावना माहेश्वरी ने बताया कि हमने विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं प्राचीन ग्रंथों कि जानकारी हेतु ग्रंथालय में विशेष प्रकार के ग्रंथों का संग्रह किया है जैसे रामायण, महाभारत, गीता, संहिता, पुराण, उपनिषद, वेद एवं पुरातन पद्धति के चार सौ प्रकार के ग्रंथों को उपलब्ध कराया गया है | ग्रंथपाल श्री शांतनु कुमार ने बताया कि हम प्राचीन पद्धति के अनुसार आसन पर बैठ कर पढ़ने के लिए प्रेरित करते है, जो कि हमारी प्राचीन परंपरा रही है
|ग्रंथालय सहायक आर.आनंद व देवेन्द्र कुमार दास ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अथक परिश्रम किया, विद्यालय के शिक्षकगणएवं प्रशासनिक विभाग ने भी वेद अध्ययनशाला के शुभारंभ पर हर्ष व्यक्त किया |
प्राचार्य बिपिन देशमुख जी ने ग्रंथालय के इस अनूठे अभिनव प्रयास की भूरिभूरि प्रशंसा की, उनके अथक परिश्रम के परिणामस्वरुप ही वेद अध्ययनशाला का ग्रंथालय में शुभारंभ संभव हो पाया |उपप्राचार्य बी विजयन ने इस अनूठे प्रयास को सफल बनाने में अपना भरपूर सहयोग दिया, प्रधानपाठिकाएं सुश्री शीजा जॉन एवं चरनीत कौर सदैव ग्रंथालय के विभिन्न क्रियाकलापों में अपना सहयोग करती रही है | उन्होंने भी इस कार्यक्रम की सराहना की |इस अनोखे प्रयास के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति का सहयोग भी सराहनीय रहा, प्रबंधन समिति के सचिव एस.स्वामीनाथन ने इस नव प्रयास कि भरपूर प्रशंसा की और कहा कि बच्चों को निश्चय ही बहुत लाभ होगा व आने वाली पीढ़ी को हम अपनी प्राचीन विरासत सौप सकेंगे | प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वी.रामचंद्रन, कोषाध्यक्ष टी.आर.वेंकटरमण एवं अन्य सदस्यों ने भी बहुत बहुत साधुवाद कहा व कार्यक्रम की सराहना की |
