अहिल्यादेवी के नाम के आगे पुण्य श्लोक का जुड़ना इस बात का प्रतीक है कि वह कितनी शुभ चरित्र वाली व्यक्तित्व थी । वे न्याय की मूर्ति थीं ,,

शासकीय नवीन महाविद्यालय रिसाली दुर्ग में पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्या देवी बाई की जन्म त्रिशताब्दी मनाई गई

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भूत पूर्व कुलपति हेमचंद विश्वविद्यालय दुर्ग – डॉ. एन. पी. दीक्षित उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथियों में देश दीपक सिंह – सह सचिव जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र , डॉ. कामता साहू- सह सचिव अहिल्या बाई होलकर त्रिशताब्दी समारोह समिति जिला, दुर्ग एवं . वी. नागेश्वर राव थे ।महाविद्यालय की संरक्षिका एवं प्राचार्य डॉ. अनुपमा अस्थाना द्वारा सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि लोकमाता का जीवन हमारे लिए एक उदाहरण है। उनका व्यक्तित्व नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है ।उन्होंने अपने कार्यों द्वारा भारत की संस्कृति एवं विरासत को समृद्ध किया ।

विशिष्ट अतिथि देश दीपक ने अपने वक्तव्य में  कहा कि भारत का अतीत गौरवशाली है जिसका प्रतीक अहिल्याबाई का जीवन चरित्र है ।मुख्य अतिथि . एन. पी. दीक्षित ने छात्र-छात्राओं को अहिल्याबाई के जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी दी ।उन्होंने कहा कि अहिल्यादेवी के नाम के आगे पुण्य श्लोक का जुड़ना इस बात का प्रतीक है कि वह कितनी शुभ चरित्र वाली व्यक्तित्व थी । वे न्याय की मूर्ति थीं । उन्होंने सदैव सत्य का पालन किया और अपनी सूझबूझ से 30 सालों तक स्वतंत्र रूप से राज्य किया।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ.पूजा पांडेय एवं मंच संचालन डॉ. ममता के द्वारा किया गया

महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं- दिया, योगेश, गजानंद, लोकेश, श्वेता पांखी,कंचन, काजल, बुशरा ,भावना ,सुजाता, आकाश, हेमलाल, उपासना, सनत , द्वारा अहिल्यादेवी की न्याय प्रियता पर  एक सुंदर नाट्य की प्रस्तुति की गई।  कार्यक्रम में प्रो.नागरत्ना गनवीर ,प्रो .निवेदिता मुखर्जी , प्रो . नूतन देवांगन प्रो. लिनेंद्र कुमार वर्मा ,प्रो. शंभू प्रसाद निर्मलकर,  प्रो. विनीता, प्रो.सतीश गोटा ,प्रो. वेद, समस्त ऑफिस स्टॉफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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