डॉ शालिनी यादव की समसामयिक कविता,,,”इलेक्ट्रॉनिक होती मोहब्बतें”
इलैक्ट्रॉनिक होती मोहब्बतें पहले पहल फेसबुक परफ्रैंड रिक्वेस्ट भेजनाफिर कोई उत्तर ना पाकरएक मैसेज भेजनाआप मुझे पसंद होक्या हम दोस्त बन सकते है? फिर फ्रैंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेने परसवालों की झड़ी लगानाकहाँ होक्या करती होशादी हो गई क्याकितने बच्चे हैंफिर फोन नम्बर माँगनाऔर झट से फोन मिलानाफोन पर बातों का सिलसिला चल पड़नाकुछ अपनी सुनानाकुछ उसकी सुननासब सपनें साझा करनामीठे झूठ की चाशनी में डुबो करभ्रमित स्नेह की मिठाई परोसनाफिर धीरे धीरे दिलों का धड़कना‘कुछ कुछ’ से ‘बहुत कुछ’ होने लगनाअकस्मात एक दिन पुछ लेनाकुछ भेजना चाहता हूँफिर जवाब का इंतजार किए बिना हीएक बिना शर्ट का फोटो भेज देनाकुछ पानी की...
