- श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे
पाटन। व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। ग्राम गातापार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा आयोजन के पंचम दिवस पर पंडित युवराज पांडेय ने यह बात कही। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
कलियुग में केवल भगवान के नाम का जाप ही मनुष्य को संसार के गहरे समुद्र से पार लगाने के लिए पर्याप्त है। भगवान के दिव्य नाम का जाप जन्म और मृत्यु के इस चक्र से आनंद, शांति और मुक्ति देगा। मनुष्य जन्म लेते ही रोना शुरू हो जाता है। पृथ्वी दुःखों को प्रसव करने वाली तपोभूमि है। मनुष्यों को अपने कर्म का फल भोगना पड़ता है। आपको किसी परीक्षा में पास करने के लिये परिश्रम करना ही पड़ेगा वहां पर आप भगवान का नाम लेकर पेपर खाली छोड कर आएंगे तो पास नही हो सकते है। भगवान का नाम लेने से आपको दुख को सहने की क्षमता मिलती है।

कथा व्यास आचार्य युवराज पांडेय ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। श्री पांडेय ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगाश्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे।

श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नन्द के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाईयां दी गई, एक-दूसरे को खिलौने और मिठाईयां बाटी गई। कथा महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भजन प्रदुम कर भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई। मौके पर पुनीत राम साहू,जयंती साहू,विमल साहू,देवकी साहू,शारदा साहू,सरिता साहू, लखन साहू,शिवांगी, शिवानी,पार्थ,युगांतर, सिद्धार्थ,सरजु साहू, लता साहू सहित श्रद्धालु गण उपस्थित थे।
