शिक्षकीय हाल क्या बताए आपको को मिल रहा मोटी वेतन ,पर हमारा भविष्य हो रहा खराब,,,,,बच्चे पढ़ाई करें या स्कूल और प्रशासन का काम

खबर हेमंत तिवारी छुरा/ आदिवासी विकास खंड छुरा के ग्राम पंचायत गोंदला बाहरा के प्राथमिक शाला के बच्चे बीते 17 अगस्त को आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़ कर गांव के दूसरे घरों से समान ढुलाई करते नजर आए यह छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें अपने भविष्य संवारने के लिए स्कूल में पढ़ने के लिए पालक भेज रहे हैं। पर शिक्षकों की मनमानी और आयुष्मान कार्ड बनाने आय एवं साथ में सहयोग करने आए कर्मचारियों की मनमानी का शिकार होना पड़ा और छोटे-छोटे बच्चों को भारी भरकम लकड़ी के बने टेबल कुर्सी को अपने छोटे छोटे मुलायम सर पर उठाकर लगभग आधा किलो मीटर पैदल चलकर लाना पड़ा मौके पर पहुंचे मीडिया की नजर उस पर पड़ी तो संबंधित शिक्षक से बात करना चाहा तो उन्होंने सीधा सीधा पल्ला झाड़ दिया और इस कृत्य का टिकरा दूसरे कर्मचारियों को फोड़ दिया बता दें कि ग्राम पंचायत

गोंदला बाहरा के उलट पारा का यह स्कूल 15 अगस्त को प्रधान पाठक के द्वारा चप्पल पहन कर तिरंगे के पूजा पाठ करने के नाम से जिले में काफी सुर्खियां बटोरी चुकी है। उसके बाद 2 दिन भी नहीं हुआ दूसरे दिन इसी स्कूल में बच्चों को ऐसा काम कराया गया है ।इससे देखकर लगता है कि पूरे ब्लॉक में शिक्षा का स्तर पूरी तरह ठप है ना तो शिक्षक टाइम में आ रहे हैं ना जा रहे हैं ना ही वे मुख्यालय में रहते हैं अधिकतर शिक्षक गरियाबंद महासमुंद रायपुर राजिम छुरा फिंगेस्वर से आना-जाना करते है। ना तो इनके आने का टाइम फिक्स है ना जाने का टाइम कई शिक्षक तो ऐसे हैं ।जो कभी प्रार्थना में शामिल ही नहीं होते है और जब क्लास लगती है। तो थोड़ा बहुत पढ़ाई करा कर मोबाइल में घुसे रहते है ऐसा नजारा आपको ब्लॉक के स्कूलों में आसानी से देखा जा सकता है। दूरस्थ इलाकों के स्कूल तो 4 बजे के पहले बंद हो जाते है। सीधा सीधा यह कहना गलत नहीं होगा कि जिस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है व्यवस्था बनाने की और विभागीय नियमों को कड़ाई से पालन कराने कि पर वह खुद सुस्त नजर आते है तो उनके आदर्शों का पालन कौन करेगा कुल मिलाकर 4 बजे तक रहो और खाना पूर्ति करो और मोटी वेतन के लिए आंदोलन करो।किंतु ब्लॉक में बैठे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी ऐसे मुद्दों को जानबूझकर नहीं उठाते जिस वजह से पूरे ब्लॉक में खासकर प्राथमिक से लेकर माध्यमिक शाला तक की पढ़ाई की स्थिति बहुत ही निम्नस्तर की हो गई है।यही वजह है कि पालक अपने बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला दिलाते हैं और खुद शिक्षक भी अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाते हैं। ऐसे में समान ढुलाई कराने और तिरंगे का अपमान करने वाले शिक्षकों के ऊपर क्या कार्रवाई होगी ।और कब व्वस्था सुधरेगा या फिर केवल नोटिस देकर रस्म अदा कर ने का यह सिलसिला चलता रहेगा ।। ,,,,,,,,वहीं इस बारे में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ,,,के के मतवाले ,,,से पूछे जाने पर बताया कि इस मामले की जानकारी मिली है जांच कर जांच प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है वैसे भी वे शिक्षक वहां व्यवस्था के रूप में आए थे इन सब चीजों की जानकारी है मुझे।

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