रोशन सिंह@उतई ।नगर के दशहरा मैदान बाजार चौक में कृपालु दरबार समिति द्वारा आयोजित आध्यात्मिक दार्शनिक रसमय प्रवचन में जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका सुश्री श्रीश्वरी देवी जी ने कहा की केवल घर छोड़कर जंगल में बैठ जाना ही वैराग्य नहीं कहलाता अपितु संसार में रहते हुए भी मन में संसार की आसक्ति का त्याग ही वास्तविक वैराग्य है। मन ही हमारे प्रत्येक कार्य का कर्ता है। अतः हमें बाहर से नहीं भीतर से विरक्त होना है संसार में ना कही राग हो ना कहीं द्वेष हो और राग और द्वेग से रहित होने का अहंकार भी ना होना यही वैराग्य की परिभाषा है।

संसार में राग और द्वेष दोनों ही खतरनाक हैं जैसे पिघली हुई लाख मे जब कोई रंग छोड़ा जाता है तो वह रंग लाख के परमाणु परमाणु में समा जाता है और लाख उसी रंग का दिखने लगता है ठीक ऐसे ही जब हम किसी से राम या द्वेष करते हैं तो हमारा अंतकरण संबंधित व्यक्ति या वस्तु के लिये पिघलता है और वो व्यक्ति हमारे अंतःकरण में समा जाता है अतः यदि हम संसार से राग या द्वेष करे तो ये संसार हमारे अंत:करण में समा जायेगा और हमारे अंतकरण को गंदा कर देगा किंतु भगवान और महापुरुष के प्रति अपने मन का लगाव किया तो जत करण शुद्ध हो जाएगा, दिव्य हो जाएगा एवं सदा-सदा के लिए हम आनंदमय हो जाएंगे।
आज रविवार को सुबह 8 बजे प्रवचन स्थल पर सकिर्तन हुई उसके बाद सुश्री शश्वारी देवी ने प्रवचन स्थल से शोभायात्रा में शामिल होकर नगर भ्रमण करते हुए नगरवासियों को प्रवचन स्थल में पहुंचकर प्रवचन रसपान करने अपील की।
आप सभी नगरवासियों से विनम्र निवेदन है कि इस दिव्य दार्शनिक प्रवचन में अधिक से अधिक संख्या में आकर इस सत्संग का लाभ उठावें।
