पाटन। उगते भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ सूर्यदेव की आराधना का चार दिवसीय छठ पूजा का महापर्व सम्पन्न हुआ। आस्था का महापर्व छठ पर आज पाटन अंचल के ग्राम सेलुद,चुनकट्टा एवं मुड़पार में निवासरत उत्तरभारतीयों ने हर्सोल्लास के साथ छठ पर्व मनाया। आज सुबह व्रतियों ने तालाब के पानी में खड़े होकर सूर्य उगने का इंतजार किया।सूर्य उगते ही अर्घ्य देकर व्रती महिलाओं ने छठी मईया से संतान, पति की लंबी आयु के साथ ही परिवार की सुख समृद्धि का आर्शीवाद मांगा। क्षेत्र में छठ पर्व का काफी उत्साह देखने को मिला।
सूर्य देव पर चढ़ाया प्रसाद
पूजा के दौरान महिला उपासकों ने भगवान के लिए बनने वाले प्रसाद गुड़ की खीर, रोटी पिट्ठा,खरना, फल, सब्जियों का भोग सूर्य देवता को लगाया गया। उसके बाद व्रतधारियों ने प्रसाद लोगों में बांटा। प्रसाद को लेकर ऐसी मान्यता है कि जिसको माता छठी का प्रसाद खाने को मिलता है। तो उसके ऊपर संकट नहीं रहता है। छठ पूजा के आखिरी दिन सुबह उपासकों ने तालाबों में पहुंचकर उगते हुए सूरज को अर्घ्य दिया इस दौरान बच्चों ने पूजा वाले स्थानों पर जमकर आतिशबाजी की। वहीं इस मौके पर युवाओं में सेल्फी लेने का क्रेज दिखा तो महिलाएं अपने परिवार की बुजुर्गों से छठ पूजा की विधि भी सीखती नजर आईं।
संतान प्राप्ति के लिए पूजा
छठ पूजा के दौरान शादीशुदा महिलाओं ने सूरज को अर्घ्य देकर संस्कारवान और स्वस्थ संतान प्राप्ति के लिए भगवान राम और सूर्यदेव से प्रार्थना की। ऐसा माना जाता कि संतान प्राप्ति के लिए छठ पर्व का बड़ा महत्व है। कहते हैं इस व्रत से संतान सुख प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि जब पांडव जुए में अपना सारा राज-पाट हार गए, तब द्रौपदी बहुत दुःखी थीं और तब श्रीकृष्ण भगवान ने उन्हें सूर्योपासना करने की सलाह दी। इसी सूर्य उपासना से उन्हें अक्षय भोजन पात्र मिला जिसमें भोजन कभी कम नहीं पड़ता था। पुराणों के अनुसार सूर्य की पहली किरण को ही सविता शक्ति अथवा छठी मईया भी कहा जाता है। सबसे पहले द्रोपदी ने छठ का व्रत किया था। तब से मान्यता है कि व्रत के सूर्योपासना करने से द्रोपदी की तरह सभी व्रती की मनोकामना पूरी होती है।
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