छत्तीसगढ़ में व्याप्त अफसरशाही सरकार और कर्मचारी को बदनाम कर रही है- विजय झा



रायपुर —छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने प्रदेश में व्याप्त अफसरशाही के कारण नियम कानून के विपरीत कार्य कर सरकार और कर्मचारी दोनों को बदनाम किए जाने का आरोप लगाया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आवाहन पर पांच दिवसीय आंदोलन के वेतन काटने का आदेश इसलिए अफसरशाही की पराकाष्ठा है जब मुख्यमंत्री स्वयं वार्ता का द्वार खुला होना बता रहे हैं। वेतन काटने के आदेश को वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिलों के कोषालय अधिकारियों ने इसी माह के वेतन से काटने का स्वेच्छा पूर्वक नियम विपरीत निर्णय लेकर जमा वेतन देयकों को वापस करा दिया। जो अफसरशाही का घोतक है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय तिवारी एवं संरक्षक विजय कुमार झा ने बताया है कि आज मुख्यमंत्री ने अनिश्चितकालीन आंदोलन की सूचना मुख्य सचिव अमिताभ जैन को प्रस्तुत करते ही वार्ता का द्वार खुला होना घोषित किया है। दूसरी ओर वित्त संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत प्रतिमाह 21 तारीख से लेकर आगामी माह के 20 तारीख तक जो शासकीय सेवक नियमित रूप से कार्य करता है, उसका वेतन 20 तारीख के बाद बनाया जाकर भुगतान किया जाता है। क्योंकि इस माह 24 तारीख तक शासकीय सेवकों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है और 25 से आंदोलन पर गए हैं, ऐसी स्थिति में वेतन काटने का आदेश अगले माह के वेतन में प्रभावी होगा। लेकिन कोषालय अधिकारी सुनियोजित ढंग से छत्तीसगढ़ सरकार को बदनाम करने के लिए इसी माह वेतन काटने और जमा वेतन देयकों को वापस करने का कार्य कर रहे हैं। कुल मिलाकर प्रदेश का कर्मचारी 5 दिन के आंदोलन में वार्ता के द्वार बंद रहने, कर्मचारियों के हड़ताल का लाभ मुख्यमंत्री मंत्रियों और विधायकों के वेतन क्रमशः 70000, 60000 तथा विधायकों का ₹50000 प्रतिमाह बढ़ जाने तथा जमा वेतन देयक को वापस करने के कारण कर्मचारियों के जले में नमक छिड़कने की स्थिति पैदा हो गई है। वेतन देयक वापस करने की निंदा संघ के महामंत्री उमेश मुदलियार जिला शाखा अध्यक्ष रामचंद्र ताण्डी, विमल चंद कुंण्डू आलोक जाधव संजय शर्मा प्रदीप उपाध्याय सुनील जारोलिया, मनोहर लोचनम आदि नेताओं ने करते हुए इस माह का वेतन भुगतान करने तथा 5 दिन की कटौती नियमानुसार अगले माह के वेतन में करने की मांग सभी कोषालय अधिकारियों से की है। अन्यथा कोषालय में नारा बाजी घेराव कर कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होगी, जिसके लिए संचालक कोष एवं लेखा जिम्मेदार होंगे।

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