बुम्हाकुमारीज पाटन में मातेश्वरी जगदम्बा की ५७ वीं पुण्य स्मृति दिवस मनाया”


पाटन– प्रजापिता बम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय पाटन में मातेश्वरी जगदम्बा की पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया, जिसमें पाटन सेवा केन्द्र प्रभारी ब्रम्ह कुमारी . शिव कुमारी ने मम्मा की विशेषता सुनाते हुए कहा कि मम्मा हमारे यज्ञ की प्रथम मुख्य प्रशासिका बनी । मम्मा की दो मंत्र हमेशा सभी को याद दिलाती । १ – हुक्मी हुक्म चला रहा । २- हर घड़ी अंतिम घड़ी है । इन दो बातों से कभी झंझट में नही फसेंगे और इकदम फ्री रहेंगे एवं नष्टोमोहा बने रहेंगे ।
आगे कहा कि जीवन में सुख:दुख: का आधार हमारे कर्म हैं । मनुष्य को अपने लक्ष्य तक पहुँचने का आधार अपना दृढ निश्चय और धैर्यता है। I

  • मम्मा के अंदर धैर्यता , पवित्रता की शक्ति बहुत थी ।
  • मम्मा के अंदर अभिमान जरा भी नही था, वह कहती थी शिव बाबा की अमृत कलश को धारण कर प्रभु प्रशाद बाँट रही हूँ।
  • उनके अंदर मातृत्व पालने की कला थी वह किसी की अवगुण को अपने में समा कर बड़े प्यार से उसे ज्ञान सुनाकर चेन्ज कर देती थी।
  • मम्मा की सिखाने की कला ही बड़ी अदभूत थी पहले वह खुद धारण करती बाद में उसे देख और करते थे। इनकी समझाने की कला ऐसी थी कि दूसरे सहज ही समझ जाते थे।
  • वह कभी अपना मनमत नही लगाती थी ।
    आगे शिवकुमारी दीदी ने कहा कि मम्मा को सरस्वती का टाईटल मिला । सरस्वती अर्थात् ज्ञान की देवी। और ज्ञान कभी खत्म नही होता वह सदैव अनवरत् अविनाशी है । इसी प्रकार मम्मा भले ही हमारे बीच से अव्यकत हुई है , परन्तु अव्यक्त होकर भी वह हमें सूक्ष्म में ज्ञान से भरपूर कर रही है । ऐसी ज्ञान की देवी मातेश्वरी मम्मा को उनकी ५७ वीं पुण्य स्मृति दिवस पर शत् शत् नमन श्रद्धांजली |

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