रोशन अवस्थी@देवभोग। देवभोग जनपद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत झाखरपारा के सरपंच, सचिव के द्वारा हैंडपंप खनन में अधिक कमीशन कमाने के चक्कर मे इलेक्ट्रॉनिक दुकान का बिल लगाकर हैंडपंप खनन करवा डाली। ग्राम पंचायत झाखरपारा के सचिव के द्वारा बोर खनन के बाद हैंडपंप लगाना भी अभी तक उचित नहीं समझा फरवरी 2022 में करीब ₹98 हजार रुपये लागत से खाम सिंह के खेत के पास पेयजल के लिए बोर खनन हुए 4 माह बीत चुके हैं। लेकिन सचिव के द्वारा वहां अभी तक हैंडपंप लगाना भी मुनासिब नहीं समझा।

झाखरपारा के सचिव के द्वारा अकेले व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में उसके खेत के पास ही बोरिंग खुदवा डाली ।और वहां के ग्रामीणों को अब तक ध्यान भी नहीं दिया। तभी तो अकेले खाम सिंह ने सरकारी बोरिंग में मोटर लगवा कर लगातार निजी उपयोग कर रहा है। और वहां निवास करने वाले अन्य लोगों को पानी देना भी अब तक मुनासिब नहीं समझा। एक शासकीय बोरिंग को अपने अंडर मे कर निजी उपयोग करना कहां क्या नियम है। लेकिन ग्राम पंचायत झाखरपारा के सरपंच सचिव के द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्यवाही इनके ऊपर नहीं की हैं बल्कि इन्हें लगातार पनाह दे रहे है। अकेले खाम सिंह को निजी उपयोग करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। और सचिव सरपंच के पनाह के चलते ही उस बोरिंग में पाइप लगाकर निजी उपयोग लगातार कर रहा है।
उस बस्ती में निवास अन्य लोगों ने भी पंचायत में इसकी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन सचिव सरपंच के द्वारा अब तक किसी प्रकार की कोई ठोस पहल नहीं की गई है। जिसके चलते खाम सिंह लगातार उस बोर में पाइप लगाकर निजी उपयोग करता आ रहा है।
बोरिंग खोदने के नए नियम के मुताबिक पंजीकृत सभी बोरिंग कंपनियों के संचालकों के लिए भी गाइडलाइन तैयार की गई है। जिसके तहत जो भी कंपनी अथवा एजेंसी बोरिंग का कार्य आरंभ करेंगी उसे अपना पंजीकरण जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के पास करवाना अनिवार्य होगा। और यदि बिना पंजीकरण के कोई बोरिंग खोदता है तो बोरिंग कंपनी अथवा एजेंसी के खिलाफ शख्स से शख्स कार्रवाई करने का निर्देश भी शासन ने जारी की है।
ग्राम पंचायत सचिव के द्वारा बोर खनन में लगाया इलेक्ट्रॉनिक दुकान का बिल…..
ग्राम पंचायत झाँखरपारा के सचिव के द्वारा बोर खनन में ओम इलेक्ट्रॉनिक का बिल लगाकर अधिक कमीशन खाने की कोशिश की है। बोर वेल कंपनी का बिना न लगाकर इलेक्ट्रॉनिक दुकान का बिल लगवा डाली । गौरतलब है कि बोर खनन के लिए बोरवेल कंपनी होती है और शासन से भी पंजीकृत होती है। लेकिन यहां तो जी एस टी बचाने के चक्कर में ग्राम पंचायत के द्वारा खुलेआम जी एस टी की चोरी की जा रही है तभी तो बोर खनन में बोर कंपनी का बिना लगाकर दूसरी फर्म का बिल सचिव के द्वारा लगाया गया हैं ।लेकिन बड़ी विडंबना की बात की विभागीय अधिकारी के द्वारा भी इस बिल को डी एस सी करवाकर पास कर रहे हैं ।और एक चैनल सा बन गया है कमीशन का जिसके चलते विभाग के द्वारा भी फर्जी फर्म का बिल को डीएससी शो करवा रहे हैं।
जब इस सम्बंध मे ग्राम पंचायत झाँखरपारा के सचिव से बात करना चाही तो बात करना भी मुनासिब नहीं समझा।
