छुरा जनपद का एक ऐसा जनपद सदस्य जिस पर संविधान का कोई भी कानून लागू नहीं होता,वन विभाग और बिजली विभाग सहित जिला प्रशासन का इस पर कार्यवाही के लिए फूल रहा है हाथ, पैर जनपद सदस्य रिजर्व फारेस्ट की जमीन पर अवैध कब्जा कर ,कर रहा है है पोल्ट्री फार्म का संचालन

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। जनपद पंचायत छुरा के एक जनपद सदस्य द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण कर पोल्ट्री फार्म बनाकर व्यवसाय के रूप में सालों से उपयोग कर रहा है।जिसको लेकर news24carate द्वारा लगातार समाचार प्रकाशित किया जा रहा है। खबर का असर ही है कि विद्युत विभाग और वन विभाग ने तत्काल ग्राम पंचायत भैरा नवापारा के ग्राम झबली बाहरा के उलट पारा पर स्थित पोल्ट्री फार्म के संचालक जनपद सदस्य व उसके भाई को पोल्ट्री फार्म मे बिजली विच्छेदन के लिए नोटिस थमाया है साथ ही वन विभाग के वन विभाग ने भी अतिक्रमण हटाने नोटिस जारी किया। जिसमें जनपद सदस्य को जमीन से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं ,पर 2 माह बीत जाने के बाद ना तो बीजली काटी गई न ही वन विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है ।ऐसे मे इन विभाग के अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही को लेकर कई प्रकार के सवाल पैदा हो रहे हैं। वर्तमान जनपद सदस्य अशोक पटेल के द्वारा अपने चुनाव के संबंध में भी कई प्रकार के जानकारी छुपा कर चुनाव जीतने का आरोप लग रहे है ।ऐसे में जनपद सदस्य जैसे जिम्मेदार पद पर रहना और वन भूमि पर कब्जा कर उसमें व्यवसाय के रूप में पोल्ट्री फार्म संचालित करना ,कई प्रकार के संदेशों को जन्म देता है।वहीं विभाग की बात की जाए तो जानबूझकर जिले में बैठे विद्युत विभाग और वन विभाग के अधिकारी कार्रवाई के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।लगातार खबर प्रकाशन के बाद क्षेत्र की जनता में कार्यवाही को लेकर आस बंधी है, पर रसूखदार जनपद सदस्य होने की वजह से अधिकारियों के हाथ पैर फूल रहे है और सविधान द्वारा निर्मित कानून भी इनके ऊपर लागू नहीं हो रहा है। कहना गलत नहीं होगा कि यही कार्य अगर कोई आम जनता करे तो उनके लिए वन विभाग का बिजली विभाग के सारे नियम लागू हो जाते हैं और उन्हें के ऊपर तत्काल कार्रवाई हो जाती है।लेकिन जिम्मेदार पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों क्यों इतना जानने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही है। बता दें कि दोनों भाई सालों से वन भूमि के बड़े झाड़ के जंगल में कब्ज़ा कर आलीशान घर एवं पोल्ट्री फॉर्म बनाकर व्यवसाय के रूप में उपयोग कर रहे हैं और साथ ही साथ पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली गंदगी और उसके डस्ट को जंगल में ही फेंक रहे हैं। साथ ही जहां निर्माण किया गया वहां के वन विभाग के मुनारा को ध्वस्त कर दिया गया है। तात्कालिक रेंजर और बिटगार्ड की मिली भगत से उस समय रोक नही लगाया गया । जिसका परिणाम है की यह अवैध कब्ज़ा। का व्यवसाय फलता फूलता रहा और जिम्मेदार मुक दर्शक बनकर बैठे रहे ।जानकार बत्ताते है की वन अधिकार पट्टे की मांग को लेकर ग्राम पंचायत मे आवेदन भी लगाया गया पर इनका आवेदन अपात्र कर दिया गया।कुल मिलाकर साफ है की सारे नियम कायदा कानून की धज्जियां उड़ाकर अवैध रूप से रिजर्व फारेस्ट की जमीन पर कब्जा होने के बाद भी अधिकारी कार्यवाही में लेट लतीफी जो कर रहे है वो जांच और कार्यवाही के नाम पर मामले में लीपापोती की ओर इशारा कर रहा है।

वर्जन

अशोक पटेल को प्रथम नोटिस दिया गया था।जिसका उन्होंने लिखित जवाब प्रस्तुत किया है।जिसे उच्च विभाग को फारवर्ड किया गया है।जैसे ही उच्च अधिकारियों का दिशा निर्देश प्राप्त होगा फिर आगे की कार्यवाही किया जाएगा।

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