ना तस्वीर बदली ना तकदीर, बदलती गई तो सिर्फ मौत के आंकड़े….

  • सुपेबेड़ा में किडनी से और एक की मौत , मौत का आंकड़ा पहुंचा बीते 5 वर्षों में 80 के पार.….

रोशन अवस्थी@देवभोग।गरियाबंद जिले के बहुचर्चित गांव सुपेबेड़ा में मौत का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। आधी रात को किडनी बीमारी से और एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई ।पूरे भारतवर्ष में सुपेबेड़ा किडनी बीमार से जग जाहिर है ।आज रात सुपेबेड़ा निवासी तुकाराम क्षेत्रफल का निधन किडनी की बीमारी से हो गया। और वे किडनी के बीमार से विगत 4 से 5 वर्षों से जूझ रहे थे ।और लगातार एम्स में उनका इलाज भी चल रहा था। तुकाराम क्षेत्रपाल एक शिक्षक थे और वे प्राथमिक शाला खमारगुड़ा में पदस्थ थे । लेकिन किडनी बीमारी से ग्रसित हो जाने के कारण लगातार चार पांच वर्षों से एम्स में उनका इलाज करवा रहे थे।
सुपेबेड़ा में बीते 5 वर्षों में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है ।और वर्तमान में 4 से 5 लोगों की हालत बहुत ही गंभीर है। और उनका इलाज एम्स मे चल रहा है।
लगभग चौदासो आबादी वाले ग्राम सुपेबेड़ा में आज भी दूषित पानी पीने को ग्रामीण मजबूर है। सरकारी आंकड़े के अनुसार सुपेबेड़ा के करीब दो सौ लोगो किडनी रोग से पॉजिटिव पाए गए हैं। इन लोगों का भी क्रिएटनीन लेवल व ब्लड यूरिया का लेवल बड़ा है जिसके कारण ये पॉजिटिव पाए गए हैं।

सरकारी वादे हुए फैल….
राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता पर आने के बाद सुपेबेड़ा को साफ पानी देने का वादा किया था ।तेल नदी से साफ पानी मुहैया कराने का वादा सरकार ने किया था।जिसके चलते प्रशासन ने ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने गांव में 90लाख रुपेय खर्च कर दो आर्सेनिक दो फ्लोराइड दो आर्सेनिक रिमूवल प्लांट लगाए भी लगाये थे। लेकिन इसका सही देख रेख के अभाव के चलते ये भी खराब होने के स्थिति मै है।और सबसे बड़ा वादा यह था कि तेल नदी से 3 किलोमीटर दूरी से पाइप लाइन के जरिए साफ पानी की सप्लाई नलों के माध्यम से कराने का प्लान था। लेकिन सरकार के ढाई साल गुजर जाने के बाद भी यह योजना अधर में लटकी है। जिसके चलते स्थिति अभी भी जस के तस बनी हुई है ।इसका ठोस समाधान नहीं निकलने की वजह से यहां ग्रामीणों की मौतों का सिलसिला लगातार जारी है ।जिसके चलते ग्रामीणों ने प्रशासन के ऊपर नाराजगी जताई है।और उनका विस्वास भी सरकार के ऊपर से धीरे धीरे उठता जा रहा है।

बीते 7 तारीख को स्वास्थ्य मंत्री टी एस सीह देव सुपेबेड़ा के दौरे में थे। और सुपेबेड़ा के लोगों के स्वास्थ्य के बारे में पहुंचकर जायजा भी लिया। लेकिन ग्रामीणों का साफ तौर पर यह कहना था, कि हमें तेल नदी से साफ पानी मुहैया कराया जाए ।वही पीड़ित परिवार के ही प्रेम प्रकाश क्षेत्रपाल ने स्वास्थ्य मंत्री से अपनी दुखड़ा बताते हुए कहा कि मेरे परिवार से अब तक 10 लोगों की मृत्यु किडनी बीमारी से हो चुकी है ।और मेरे दोनों भाई जीवन व मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। जिनमें से आज उनके बड़े भाई तुका राम क्षेत्रफल का मृत्यु हो गया और उनके छोटे भाई प्रेम जय अभी भी किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं। मंत्री से यह भी मांग की जा रही थी कि डायलिसिस मरीजों को प्रतिमा आर्थिक मदद के रूप में ₹15000 रुपए सरकार को देने का मांग रखी थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने ग्रामीणों की मांग को मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया है।

ग्रामीणों का भरोसा था कि स्वास्थ्य मंत्री के सुपेबेड़ा के दौरे के दौरान पूरे गांव को नदी से साफ पानी देने का वादा स्वास्थ्य मंत्री पूरा करेंगे ।लेकिन मंत्री जी के द्वारा टालमटोल जवाब देकर जल जीवन मिशन से पानी देने की बात कह कर चले जाने से ग्रामीणों में शुद्ध पेयजल को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।

एक ही परिवार से अब तक 11 लोगों की मृत्यु….
सबसे बडी चिंता का विषय है कि अब तक एक ही क्षेत्रपाल परिवारों से अब तक 11 लोगों की मृत्यु किडनी बीमारी से हो चुकी है। जिसके चलते पूरा परिवार उनके सदमे में है। और सरकार से बार-बार अपील कर रहे हैं कि हमें आर्थिक सहायता दिया जाए ताकि हम ये गांव छोड़कर अन्यत्र कहीं जाकर बस जाएं। और दूषित पानी से हमें कम से कम निजात मिल पाए।

वर्जन….

सी एम एच ओ ऐन आर नवरत्ने ने इस संबंध में गोल मटोल जवाब देते हुए कहा कि पैरोटेरियल डायलिसिस के अंतर्गत यह पहला मृत्यु है। और इसके पहले जो भी मृत्यु हुई है। वह ब्लड शुगर के कारण हुई है । बड़ी विडंबना की बात है कि मौत का सरकारी आंकड़े सही तरीके से बताना भी उचित नहीं समझा।

सी. एच् .एम .ओ. ऐन आर नवरत्ने

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