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रायपुर–पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ ने अपने तीन पदाधिकारियों हरीश कुमार पांडे, गिरीश सेन एवं पुरुषोत्तम कहार द्वारा चलती हड़ताल के दौरान संघ की जानकारी के बगैर कार्यालय में उपस्थिति देकर कार्य करने एवं संघ के अन्य कर्मचारियों को भी काम पर वापस लाने के लिए दबाव बनाने की कृत्य से नाराज होकर आम सभा में लिए गए निर्णय अनुसार नोटिस जारी किया है एवं तत्काल इन तीनों से स्पष्टीकरण मांगा है, स्पष्टीकरण मिलने के बाद आम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर संघ अग्रिम कार्यवाही करेगा । गौरतलब है कि कर्मचारी संघ 17 मई से 10 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे थे , इसी मध्य शासन ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ गिरीश कांत पांडे को हटा दिया था, उनके स्थान पर किसी अधिकारी को नहीं भेजने के कारण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर के. एल. वर्मा ने तातकालिक व्यवस्था के तहत कुलसचिव डा शैलेंद्र पटेल को प्रभारी कुलसचिव बनाया है। कुलसचिव पटेल जी के चार्ज लेते ही अन्य पिछड़ा वर्ग के समर्थित कुछ पदाधिकारियों ने अपने कर्मचारी संघ की कार्यकारिणी सदस्य होने के नाते मांग पूरा हुए बगैर हड़ताल को स्थगित करने पर दबाव बनाना शुरू कर दिए थे , लेकिन सँघ अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए हड़ताल पर डटे रहे । इसी बीच अन्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ ने अपने सदस्यो की आमसभा में चलने का फरमान जारी किए उनकी आम सभा भी चलती रही,लेकिन वहां की सभा में अन्य पिछड़ा वर्ग के बहुत से कर्मचारी नहीं गए । इस हड़ताल को स्थगित कराने के लिए चंद विशेष वर्ग के कुछ चापलूस किस्म के चाटुकार कर्मचारी भी शामिल हो गए, लेकिन संघ ने हड़ताल को स्थगित नहीं किया ,जिससे परेशान होकर उक्त कर्मचारियों ने कुछ कर्मचारियों को साथ लेकर कार्यालय में उपस्थिति देकर कार्य करना शुरू कर दिए । जिस की जानकारी मिलने पर संघ की आम सभा में निर्णय लेकर नोटिस जारी किया गया है , जिसमें उल्लेख है कि संघ द्वारा पूर्व में ही अपने कर्मचारियों से आम सहमति लेकर ही संघ द्वारा हड़ताल किया गया संघ के कुछ कार्यकारिणी सदस्यगण कुलसचिव जी से हुई चर्चा में उपस्थित थे कुलसचिव द्वारा बिना हताक्षर के प्रस्ताव पत्र पर संघ के द्वारा उक्त 10 बिंदुओं पर चर्चा कर एक प्रस्ताव पत्र तैयार किया गया जिसमे पदाधिकारी के हैसियत से वे भी शामिल रहे , उसी प्रस्ताव को सभी ने हस्ताक्षर कर कुलसचिव को दिए थे , लेकिन जिम्मेदार पदाधिकारी होते हुए भी बिना लिखित आश्वासन एवं बिना संघ की जानकारी के कार्यालय में उपस्थित होकर कार्य करना प्रारंभ कर दिए , जो संघ विरोधी कृत्य की श्रेणी में आता है । संघ के अध्यक्ष श्रवण सिंह ठाकुर एवं प्रदीप कुमार मिश्र ने हड़ताल की समाप्ति पर कहा था कि कोई भी कर्मचारी हो या पदाधिकारी दलाली का काम करता है , वह संघ का किसी भी रूप में सदस्य / पदाधिकारी नहीं बन सकता और जो अपने संघ एवं कर्मचारियों के प्रति समर्पित रहता है , वहीं संघ का पदाधिकारी बन सकता है। कर्मचारी हित में निस्वार्थ सेवा करने के कारण ही कर्मचारी संघ 2001 से …सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना…… से आज तक कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय में दलाल किस्म के कर्मचारी न एक अच्छा कर्मचारी बन सकता है और न सँघ का पदाधिकारी । ऐसे लोग जरूरत पड़ने पर न सँघ के होते हैं , न कर्मचारी के होते हैं , न संस्था के होते हैं और ना अधिकारी के होते हैं । ऐसे लोग संघ के लिए केंसर के समान बड़े घातक होते हैं , जो अपने हित के लिए संस्था के अधिकारियों को गुमराह कर संस्था को ही बर्बाद कर देते हैं और अंत में अधिकारी को ही बर्बाद कर यहां से रवाना करवा देते हैं । ऐसे लोग अपने हित के लिए सबके साथ केवल यूज एंड थ्रो का काम करते हैं , ऐसे लोगों से कर्मचारियों को और अधिकारियों को सचेत रहने की जरूरत है। श्रवण सिंह ठाकुर अध्यक्ष , प्रदीप कुमार मिश्र सचिव , पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ रायपुर।
