.थक कर कलेक्टर जनदर्शन गरियाबंद में लगाया आवेदन
परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। छुरा तहसील के ग्राम रजनकटा के कृषक खेमलाल यादव पिता लीलाधर वगैरह के नाम से ग्राम रजनकटा पटवारी हल्का नंबर 17 तहसील छुरा जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़ में पैतृक कृषि भूमि है। जिस पर वर्षों से वह कृषि कर रहा है तथा वर्तमान में भी उसका कब्जा है ,भूमि का खसरा नंबर 72/1 रकबा 0.048 हेक्टेयर है। किंतु बंदोबस्त के दौरान उक्त भूमि से कृषक का नाम छूट गया जिसका त्रुटि सुधार हेतु कृषक द्वारा वर्ष 2012 में तहसील कार्यालय छुरा में आवेदन दिया गया एवं प्रमाण के लिए बंदोबस्त के पूर्व का फार्म बी 1 वर्ष 1980- 81 तथा खसरा पांच साला सन 1982-83 से 1986-87 का प्रस्तुत किया गया ।पटवारी हल्का नंबर 17 द्वारा मौका जांच कर दिनांक 9 अगस्त 2017 को नायब तहसीलदार छुरा को अपना प्रतिवेदन एवं पंचनामा दिया गया। जिसमें स्पष्ट लिखा गया कि खसरा नंबर 72/1 रकबा 0.048 हेक्टेयर भूमि खेमलाल यादव के नाम पर बंदोबस्त के पूर्व था। वर्तमान में कृषक द्वारा उस भूमि पर कृषि कार्य कर रहा है तथा उसका कब्जा है अतएवं त्रुटि सुधार कर उक्त भूमि को कृषक के नाम पर किया जाए ।जांच प्रतिवेदन के पश्चात न्यायालय नायब तहसीलदार छुरा जिला गरियाबंद ने अपने आदेश दिनांक 23 जनवरी 2021 में प्रमाणों के आधार पर उक्त भूमि को खेमलाल यादव का होना पाया तथा पटवारी को रिकॉर्ड अद्यतन करने निर्देशित किया। किंतु आज 16 माह व्यतीत होने के बाद पटवारी द्वारा रिकॉर्ड अद्यतन नहीं किया गया। इस बीच दिनांक 18 अप्रैल 2022 को उक्त भूमि को किसी दूसरे का बताकर पटवारी द्वारा नाप कर किसी क्रेता का बताया जा रहा था। जानकारी मिलने पर कृषक द्वारा विरोध कर भूमि को अपना होने का प्रमाण दिया गया ऐसी स्थिति में कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है। क्षेत्र में भूमि दलाल सक्रिय है जो कृषि भूमि को क्रय करके अवैध प्लाटिंग कर विक्रय करते है तथा ऐसी भूमि को एन केन प्रकारेण हड़पने का प्रयास करते हैं।
कृषक ने अपने बयान में संवाददाताओं से कहा कि यदि मेरे साथ किसी प्रकार की अनहोनी घटना घटती है तो इसकी संपूर्ण जवाबदारी पटवारी हल्का नंबर 17 एवं तहसीलदार छुरा की होगी। जिन्होंने इस प्रकार के सारे प्रमाण के बाद भी इतने वर्षों तक लटका कर रखा हुआ है।
इस संबंध में कृषक द्वारा नायब तहसीलदार छुरा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छुरा को दिनांक 19 अप्रैल 2022 को आवेदन देकर रिकॉर्ड अद्यतन करने निवेदन किया गया।
ज्ञात हो रकबा 0.048 हेक्टेयर अर्थात 12 डिसमिल भूमि त्रुटि सुधार में 10 वर्ष लग गए किंतु रिकॉर्ड का सुधार न होना अपने आप मे अद्वितीय प्रकरण है। क्या यही राजस्व विभाग की न्याय व्यवस्था है? जो अत्यंत दुःखद एवं चिंतनीय है।
दिनांक 2 मई 2022 को कृषक द्वारा कलेक्टर जनदर्शन गरियाबंद में आवेदन प्रस्तुत कर न्याय प्रदान करने का निवेदन किया गया।
कृषक ने आगे विधानसभा भ्रमण के समय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को आवेदन देकर न्याय मांगने की बात कही है।
