राकेश कुमार साहू @ मगरलोड। मगरलोड भरदा मधुमक्खियों का कहर बरसा ग्राम पंचायत भरदा में नहाने गये लोग मधुमक्खी भगा रहे थे जिसे ग्रामीण लोग नहाने गये थे उसे छोड़ कार्य घर आना पड़ा, ग्राम भरदा में तालाब के किनारे बरगद का पेड़ है जिसमें मधुमक्खियों का छत्ता है गर्मियों के कारण या किसी पक्षी या जीव मधुमक्खियों के छत्ते को क्षति पहुंचाने पर, मधुमक्खियां नहाने गए लोगों को तथा रोड पर चलते फिरते लोगों को मधुमक्खियां भगाने डराने लगे जिस वजह से लोग हुए परेशान, मगरलोड भरदा में मधुमक्खीयां का कहर बरसा ग्राम पंचायत भरदा में नाहने गये लोगो क़ो मधुमक्खी भगा रहे थे जिसे ग्रामीण लोग नाहने गये थे उसे छोड़ कार्य घर आना पड़ा, ग्राम हरदा में तालाब के किनारे बरगद का पेड़ है जिसमें अपना छत्ता बना लिया है गर्मियों के कारण या किसी पक्षी या जीव मधुमक्खियों के छते को क्षति पहुंचाने पर, मधुमक्खियां नहाने गए लोगों को तथा रोड पर चलते फिरते लोगों को मधुमक्खियां भगाने डराने लगे जिस वजह से लोग हुए परेशान और अपने सामान को छोड़ने के लिए और भागने के लिए मजबूर हो गये ,पर मधुमक्खियों मधु, परागकण आदि की प्राप्ति के लिए मधुमक्खियाँ पाली जातीं हैं। यह एक कृषि उद्योग है। मधुमक्खियां फूलों के रस को शहद में बदल देती हैं और उन्हें छत्तों में जमा करती हैं। जंगलों से मधु एकत्र करने की परंपरा लंबे समय से लुप्त हो रही है। बाजार में शहद और इसके उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण मधुमक्खी पालन अब एक लाभदायक और आकर्षक उद्यम के रूप में स्थापित हो चला है। मधुमक्खी पालन के उत्पाद के रूप में शहद और मोम आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
मगरलोड के ग्राम भरदा में बरसा मधुमक्खियों का कहर
