छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच छेरछेरा की अब होगी नए कलेवर में प्रस्तुति…..पुनः छेरछेरा की बागडोर सम्हालेंगे टिकेंद्र वर्मा…..24 वर्ष पहले हुई थी छेरछेरा की स्थापना

पाटन।”छेरछेरा” नाम सुनते ही जेहन में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और त्योहार याद आते हैं, लेकिन पाटन क्षेत्र में इस नाम के एक और मायने है सांस्कृतिक कार्यक्रम .
जी हां छत्तीसगढ़ी कहानी हास्य छत्तीसगढ़ी गाने संजोए लोक कला मंच छेरछेरा विगत 24 वर्षो से लोगों को हँसाता गुदगुदाता रहा है।

छेरछेरा सांस्कृतिक संस्था छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं अपनी सौंदर्यता और विलक्षणता के लिए मशहूर है जंहा लोगों में दूसरों के प्रति जो सहानुभूति मया दुलार और सम्मान देने की भावना है किन्तु पिछले कुछ वर्षों से कलाकारों और मार्गदर्शक के आभाव में विलुप्त होते हुए लोकमंच छेरछेरा को पुनः प्रज्वलित करने में लोक कलाकार लगे हुए थे।
निर्देशक संतोष रघुवंशी के समक्ष लेखक रामेश्वर निर्मल द्वारा अपनी यह कहानी एवं गीत को पूरे अधिकार के साथ मंचीय प्रस्तुती के लिये टिकेन्द्र वर्मा को पुनः छेरछेरा का बागडोर सौंप दिया गया है।
इस अवसर पर चुन्नू पटेल, लक्ष्मीनारायण सोनवानी, घनश्याम कामड़े शिव कुमार सेन, यशवंत वर्मा, विवेक निर्मल उपस्थित रहे।

ये है छेरछेरा का इतिहास….

छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच छेरछेरा का स्थापना 24 मई 1998 को क्षेत्रीय विधायक भूपेश बघेल (परिवहन मंत्री) मध्यप्रदेश एवं हेमंत देवांगन पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पाटन के आतिथ्य में कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ था जिसे  टिकेन्द्र नाथ वर्मा के संचालन एवं संयोजन में प्रारंभ किया गया था, कहानी के लेखक एवं गीतकार  रामेश्वर प्रसाद निर्मल एवं  संतोष रघुवंशी के निर्देशन के साथ-साथ कुछ ऐसे शशक्त कलाकार में चुन्नू पटेल, स्व. पंचराम बनपेला, स्व. नरेन्द्र क्षत्रीय, स्व. केशव साहू इन सभी कलाकारों के त्याग और समर्पण से छेरछेरा को लम्बी उंचाई मिली।

छेरछेरा की प्रस्तुती छत्तीसगढ़ राज्य के अलावा अन्य राज्य में भी अपना विशेष प्रस्तुती के माध्यम से जनमानस के बीच अपनी छटा बिखेरती रही। छत्तीसगढ़ में कहानी को लेकर मंच में प्रस्तुत करने वाली सांस्कृतिक संस्था कारी (रामचंद देशमुख) के बाद छेरछेरा दूसरे स्थान पर रहा। छेरछेरा कहानी समाज और परिवार को जीवन जीने का संदेश देती है।

अब नए कलेवर में होगी प्रस्तुति…

संचालक टिकेंद्र नाथ वर्मा ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम हरेली को अब छेरछेरा में विलय कर दिया गया है और अब दोनों संस्था के बेहतरीन कलाकारों के साथ छेरछेरा अब एक नए अवतार में देखने को मिलेगा।

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