भिलाई नगर। भिलाई के सेक्टर 2 गणेश पंडाल में आयोजित विलक्षण दार्शनिक प्रवचन के पांचवे दिन डॉ भक्तिश्वरी देवी ने कहा कि भगवान को जानने के लिए क्या कुछ बड़ी लेबल की अक्ल होनी चाहिये? जी नहीं? जब सरस्वती बृहस्पति की बुद्धि फेल हो जाती है। तब हम लोगों की क्या हैसियत है? लेकिन हम निराश नहीं होंगे। अनेक लोगो ने उनको जाना है।मीरा, कबीर, सूर, तुकाराम, नानक,शंकराचार्य आदि अनेक सन्तो ने उनको जाना है,पाया है। भगवत कृपा के द्वारा उनको पाया जा सकता है। अनंत कोटि कल्प शास्त्र वेद पढ़कर कोई व्यक्ति भगवान को नहीं जान सकता।केवल ईश्वरीय कृपा से ही काम बनेगा। कोई कोई कहते हैं माया हमारी पीछा छोड़ दें तो काम बन जायेगा। लेकिन यह माया भी भगवान का शक्ति है। उनकी कृपा से ही जाएगी। तो क्या संत मिल जाएंगे तो काम बन जायेगा? जी नहीं भगवान की कृपा से ही संत की प्राप्ति होगी। तो भगवान कृपा करेंगे तो काम बनेगा। वह कृपा नहीँ की हमारा काम नहीं बनी ।ऐसा है क्या ? जी नहीं। भगवान हमारा कर्म नही करते है। कर्म हमको करना है । कुछ लोग भाग्य की दोष लगते हुए बैठ गए। अपना पिछले जन्म का कर्म ही भाग्य होता है। अतः हमको भगवत कृपा पाने के लिए कुछ करना पड़ेगा। कृपा की शर्त होती है, वो हम करले, बस कृपा हो जाएगी।
अनंत कोटि कल्प शास्त्र वेद पढ़कर कोई व्यक्ति भगवान को नहीं जान सकता-डॉ भक्तिश्वरी देवी
