परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद
गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़के जो गांव और कस्बा से होते हुए ब्लाक मुख्यालय और जिला मुख्यालय को जोड़ती है।इस योजना की जितनी तारीफ किया जाए उतनी ही कम है।लेकिन ये सड़के निर्माण के माह भर बाद ही नही टिक पा रहे है। ऐसे में गुणवत्ता को लेकर हर बार मीडिया सवाल उठाती रही है। जिसमे ठेकरदार और अधिकारी,कर्मचारियों की मिलीभगत से आम जनता त्रस्त है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा की सड़कों में डामर तो नही चिपक पा रहा है पर विभाग के कार्यपालन अभियंता साहब अपने कुर्सी से इस कदर चिपके हुए है की राज्य शासन की नियम के तहत उखड़ने का नाम नही ले रहा है।बता दे की राज्य शासन का नियम है की अधिकारी कर्मचारी को तीन साल में तबादला होना रहना होता है।उसका मुख्य है की एक जगह रहकर कोई भी अधिकारी कर्मचारी संबधित क्षेत्र को ज्यादा प्रभाव न कर सके इसलिए चुनाव पूर्व इनका स्थांतरण कर दिया जाता है।लेकिन जिले में कई ऐसे अधिकारी है जो 10-15 सालो से एक जगह ही जगह जमे हुए है जो टस से मस नहीं हो पा रहे है।जिसे राज्य शासन भी इधर से उधर नही कर पा रहे है। ऐसे ही हाल इन साहब का है।
जी हां हम बात कर रहे है गरियाबंद जिले के प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता प्रदीप वर्मा की।जो जिले में लगभग 7-8 सालो से एक ही जगह कुंडली मारकर बैठा हुआ है।जानकर बताते है की साहब गरियाबंद जिले के मूलनिवासी है जिसका निवास गरियाबंद नगर पालिका के गांधी मैदान के आस पास बताते है। ऐसे में इस प्रकार साहब के प्रभाव का ही असर है की विभाग के विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नदारद है और बार बार शिकायत व खबर प्रकाशन के बाद भी कार्यवाही कुछ भी नही हो पा रही है।नतीजन खराब सड़क निर्माण ,नाली निर्माण, पुल निर्माण और कुछ महीनो में सड़को की हालत बद से बत्तर होती जा रही है।
जिसमे जिले के दोनो विधानसभा के विधायक सहित जनपद और जिला पंचायत के जनप्रतिनिधि और नेता भी मूकदर्शक बन बैठे है।इन अधिकारियों का उच्च विभाग में और ओहदे पदो पर बैठे राजनीतिक नेताओं के साथ अच्छी पकड़ होने के चलते इनका तबादला नहीं हो पा रहा है।नतीजन निर्माण कार्यों में जमकर मनमानी व लीपापोती लगातार जारी है।नतीजन शासन और आम जनता की योजना को पलीता लगाकर चमचमाती गाडियां व बंगले इनके जरूर दिखाई देता है।
बताना लाजमी होगा की राजनीतिक आड़ की वजह से जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारी भी बौने साबित हो रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय सहित अन्य स्थानों पर संचालित जिला कार्यालयों में वर्षों से जमे कर्मियों द्वारा उच्च अधिकारियों का भय तक नहीं होने की वजह से मनमानी की जा रही है।तो वही शासन स्तर पर इन कर्मचारियों की नई पदस्थापना की कोई सुगबुगाहट भी दूर दूर तक दिखाई नही पड़ रही है।विभिन्न विभागों में वर्षों से टिके कर्मचारी अपने दबदबे व प्रभाव की वजह से आज भी कई वर्षो से एक ही कार्यालय में जमे हुए हैं। इनका न तो स्थानांतरण हुआ और न ही इनका विभाग बदला गया है। सारे नियम कानून को धत्ता बताते हुए अपनी पहुंच का धौंस दिखाकर कार्यालय में जमे हुए हैं। उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी होने के बावजूद उन्हें हटाने कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इससे शासन के महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहा है।
