देश के भविष्य युवा पीढ़ी को उन्हे जानने समझने का इससे सुनहरा अवसर हो ही नहीं सकता
आज बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर जी की जयंती है। आज के दिन स्कूल और कालेजों में छुट्टी देकर इस महान शख्स के बारे में जानने और समझने का जो अवसर था उसे भी सरकारों ने छीन लिया। घर में बैठ कर आज के दिन ज्यादातर युवा पीढ़ी या तो कोई फिल्म देखेंगे या शोसल मीडिया में समय बिताएंगे। आज के युवाओं को कौन बताएगा की बाबा साहब की क्या उपलब्धि थी। आज तक हमें सिर्फ यही बताया गया की वो संविधान निर्माता है बस। हमने यह बता कर उनके कद की अवहेलना की है मानो। बाबा साहब कितने संघर्षों के बाद उस मुकाम पर पहुंचे जहा बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं। आज भी कई उदाहरण है की बहुत से लोगों ने कठिन परिस्थितियों से संघर्ष कर अपने आपको सिद्ध कर दिखाने में कामयाब हुवे है।
बाबा साहब इस लिए महान है क्यों की वो जब सबसे बड़े औधे में संघर्षों के बाद पहुंचे, उसके बाद वो दलित और वंचितों के अधिकार के लिए लडे, जिनके बारे में कोई नहीं सोचता था। उनकी रक्षा के लिए वो उस वक्त के बड़े बड़े नेताओं के सामने अपनी बातो को रखते और सिद्ध कर मनवाते थे। वो भूले नहीं अपने लोगो को। आज के नेता पद में बैठने तक वो अपने दलित, पिछड़े और वंचितों की बाते करते है जैसे ही पद मिला वो सबसे पहले अपने वर्गो और लोगो से दूर हो जाते है। बाबा साहब की धैर्य और संहनशीलता ही उन्हे महान बनाती है।
भारत सरकार और प्रदेशों की सरकारों को चाहिए ही बाबासाहेब की ही तरह देश की महान विभूतियों के जन्मदिन व पुण्यतिथि पर छुट्टियां रद्द कर ,आज की युवा पीढ़ी को उनके विषय में आज के दिन पूरी विस्तृत जानकारी दी जाय ताकि देश का भविष्य देश की महान विभूतियों और उनके संघर्षों को जान सके और उनसे सीख लेकर अपना आत्मविश्वास बढ़ाकर स्वयं भी जीवन में एक बड़ा मुकाम उनके पदचिन्हों पर चलकर पा सके।
सतीश पारख उतई दुर्ग छत्तीसगढ़
सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता,स्वतंत्र पत्रकारिता
(व्यक्तिगत विचार)
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