दुर्ग ( न्यूज 24 कैरेट/सतीश पारख) दुर्ग ग्रामीण एवं पाटन विधानसभा क्षेत्र के उतई थाना क्षेत्र के विभिन्न गावो में अवैध प्लाटिंग का कार्य धड़ल्ले से हो रहा है। किसानों के खेत को एकमुश्त लेकर उसे छोटे छोटे प्लाट बनाकर बेचने का कार्य जोर पकड़ता जा है। नियम कानून को ताक में रखकर भूमाफिया जमीन का सौदा धड़ल्ले से कर रहे है।लेकिन एस डी एम, तहसीलदार व पटवारी आर.आई.को यह सब देखने का फुर्सत नही है??
जमीन दलाल कई खेतो को बिना डॉइवर्टेड जमीन को डाइवर्टेड बताकर भोले भाले ग्रामीणो को ठगने का भी कार्य कर रहे है। कई बार थाने में पैसे के लेन देन को लेकर अक्सर शिकायत होती रहती है, किसी स्थान पर मात्र चुना लगा कर तो किसी किसी स्थान में क्यारी नुमा बनाकर तो कंही कंही मात्र एक छतरी तान कर जमीन बेचने का कार्य किया जाता है। दुर्ग पाटन मुख़्य मार्ग सिक्स लेंन के रूप में परिवर्तित हो गया है।जिसके कारण सड़क किनारे की जमीनों का दर बढ़ता जा रहा है।जिन ग्रामो में अवैध प्लाट बेचने का कार्य हो रहा है। उतई, उमरपोटी, खोपली, कोकड़ी, हनोदा, धनोरा, हनोदा, मचांदुर, कोडिया, पतोरा, सेलूद, पेंड्री छाटा, महकाखुर्द, रिसामा, महकाकला, डूमरडीह सहित अनेक ग्राम प्रमुख है।
अवैध प्लाटिंग में पटवारियों की भूमिका संदिग्ध??
जहां एक और राज्य सरकार इस कारोबार पर सख्त कार्रवाई की बात कहती है वहीं दूसरी ओर अनुभागीय अधिकारी ,तहसीलदार,मुख्य नगरपालिका अधिकारी पंचायत सचिवों व स्थानीय प्रतिनिधियों के नजरों के सामने ही अवैध प्लाटिंग का कारोबार फल फूल रहा है । नगर निवेश के अप्रूवल के बिना ही इस तरह से जो अवैध प्लाटिंग चल रहा है आगे चलकर डायवर्सन की समस्या आ रही अनुभागीय अधिकारी के कार्यालय के चक्कर लगाते लोग देखे जा सकते हैं। जहाँ एक ओर आम आदमी के साधारण रजिस्ट्री में दो, तीन बटांकन आने पे समस्या आ जाती हैं, वही इन कारोबारियो के पांच से भी अधिक बटांकन में आसानी से रजिस्ट्री हो जाती हैं। जिसमे पटवारिओ की भूमिका काफी संदिग्ध है,??
नियम कायदे को ताक में रख करते है प्लाटिंग
ग्रामीण अंचलों की कृषि जमीन पर अवैध प्लांटिंग करने कुछ रसूखदार भू-माफिया द्वारा सारे नियम कायदों को ताक में रख कर एवं कॉलोनाइजर एक्ट के उल्लंघन कर कृषि जमीन में सीमेंट का पोल लगाकर, चुना लगा कर, क्यारिनुमा बना कर अवैध प्लांटिंग किया जा रहा हैं।
भूमाफिया करते है दिखावा, सुविधाओं का अभाव
अवैध प्लाटिंग का धंधा पिछले कई वर्षों से चल रहा है। दलालों के चक्कर में लोग जमीन की खरीदी तो कर लेते हैं, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं मिलती। प्लाट काटने वाले 10 से 15 फीट की सड़क छोड़ देते हैं और मुरुम बिछा देते हैं। वर्षों तक कॉलोनी के रहवासियों को बिजली, पानी, सड़क, नाली और अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
प्लांटिंग के लिए नही ली जाती अनुमति
नगर सहित जिले में जितनी भी जमीनों की खरीदी बिक्री हो रही है, उनमें एसडीएम, टाऊन व कंट्री प्लानिंग कार्यालय और नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायत में आवेदन देकर औपचारिकता निभा देते हैं। प्लाटिंग के लिए कहीं से भी कोई अनुमति नहीं मिलती तो भी प्लाट काट काट के बेचा जाता है। नगर व आसपास के किसी भी गांव में जमीन प्लाटिंग की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके बेधड़क अवैध प्लाटिंग जारी है। मतलब नाक के नीचे ही अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।
केवल आश्वासन
अवैध प्लाटिंग का खेल शहर के साथ गांवों में भी जारी है। इस पर कार्रवाई के लिए दो विभाग मौजूद है, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं कर रहा। नगरीय क्षेत्र में हो रहे अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई करने नगर पँचायत के पास अधिकार है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग पर राजस्व विभाग मतलब एसडीएम कार्यालय कार्रवाई कर सकती है। दोनों विभाग के अधिकारी हर बार आश्वासन देते हैं कि कार्रवाई की जाएगी, लेकिन दिखावे के लिए नोटिस दे दिया जाता है।जिससे भूमाफियों के हौसले बुलंद रहते हैं। जबकि इस पर बड़ी कार्रवाई की नितांत आवश्यकता है।
ग्राम पंचायत एवं नगर पंचायतों को सुविधा देने में होती है परेशानी
ऐसी बसी अवैध कालोनी में बिजली, पानी, सड़क, नाली एवं अन्य सुविधा का अभाव होता है, बाद में जब इन स्थानों में लोग बस जाते है तो आवश्यक सुविधा की मांग करने लगते है, ऐसी स्थिति में इन अवैध कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं देने के लिए ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, किसी भी प्लाट को खरीदने के पूर्व आवश्यक जानकारी लेकर प्लाट क्रय करना ही उचित है अन्यथा आने वाले समय में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अवैध प्लाटिंग की जानकारी नगर पँचायत एवं ग्राम पंचायत को होने के बाद भी कार्यवाही नही होती जो प्रतिनिधियों व अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
