डीएव्ही पब्लिक स्कूल कमेटी द्वारा वेतन रोकना किसी अपराध से कम नही -अरुण पाण्डेय

डीएव्ही स्कूल कमेटी की असंवेदनशीलता, 9 माह से कर्मचारियों को नही दिया वेतन

शिवसेना ने मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिख दी जानकारी, किया कड़ी सज़ा देने के निर्देश की अपील

रायपुर. शिवसेना ने युवानेता प्रदेश सचिव युवासेना डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय् ने छत्तीसगढ़ राज्य के डीएव्ही पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट कमेटी द्वारा राज्य भर के विभिन्न केंद्रों में विगत 8 – 9 माह से अपने कर्मचारियों को जिनमें शिक्षक शिक्षाकाएं भी शामिल हैं को वेतन ना दिए जाने की जानकारी देते हुए इसकी शिकायत राज्य के मुख्य सचिव को की है तथा मुख्यमंत्री से इस संबंध में कड़ी कार्यवाही करने का आग्रह किया है।

पत्र में उन्होंने लिखा हैकि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में मॉडल विद्यालय की तर्ज़ पर डीएव्ही पब्लिक स्कूल के साथ समझौता करते हुए राज्य की पूर्व सरकार ने सभी विद्यालयों को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय किया था। जोकि निजी हाथों में इन विद्यालयों के जाने से वहां के कर्मचारियों को शासन द्वारा तय नियमानुसार वेतन व अन्य सुविधाओं से वंछित होना पड़ा, साथ ही वर्तमान में उन्हें लगभग 8 – 9 माह से इन संस्थान के विद्यालयों में कर्मचारियों को वेतन नही दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन आवाज़ उठाने पर नौकरी चले जाने के भय के चलते आज तक कर्मचारी चुप हैं व सेवा भी जारी रखें हुए हैं। लगातार दौरा करते रहने वाले व प्रत्येक वर्ग के लोगों से संपर्क रखने वाले सक्रिय युवानेता को यह जानकारी कई कर्मचारियों ने दी है।

डॉ. अरुण पाण्डेय् ने लोकहित से चर्चा में कहा कि ‘कोरोना वायरस (कोविड -19) के संक्रमण को देखकर देश के प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्री के आदेश व निर्देश के बावजूद आज तक डीएव्ही ग्रुप द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन ना दिया जाना अपराध की श्रेणी में आता है। भुगतान ना होने की जानकारी प्रशासन चाहे तो तत्काल कर्मचारियों के बैंक या अन्य स्थानों से जानकारी संग्रहित करते हुए प्राप्त कर सकती हैं।’

उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव से विनम्रता पूर्वक अपील है कि सर्वप्रथम इस मामले जांच करके, अब तक के वेतन कर्मचारियों के खाते में तत्काल ट्रांसफर करवाने के कड़े निर्देश डीएव्ही मैनेजमेंट कमेटी को देवें व आगे इन ओर कड़ी से कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित कर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना करने वाले पर कठोर निर्णय लेते हुए इनका समझौता समाप्त करने के निर्देश जारी करें।

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