भिलाई(न्यूज 24 कैरेट/सतीश पारख)सेक्टर 2 श्री संत शिरोमणी नामदेव महाराज गुडी पाडवा नवरात्र त्यौहार प्रशांत कुमार क्षीर सागर निवास स्थान पर प्रति वर्ष की भांति खुशी एवं हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया उषा क्षीरसागर ने जानकारी बताया कि गुड़ी पाडवा का त्यौहार कैसे कथा और कैसे तैयार करते हैं गुड़ी हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पाडवा का पर्व मनाया जाता है इसी दिन चेत्र नवरात्रि भी शुरू होती है माता के नौ रूप नव दुर्गा की पूजा अर्चना के साथ नवरात्र प्रवेश प्रारंभ होता है यह 9 दिनों तक पूजा पाठ अभंग हरिपाठ हवन सभी भक्तजन नवरात्र पूजा की शुरुआत होती है
क्यों मनाते हैं गुड़ी पड़वा
नवरात्रि पर्व महत्व धार्मिक महत्त्व श्री संत शिरोमणि नामदेव महाराज मंदिर सेक्टर 2 प्रशांत कुमार क्षीर सागर जानकारी दी गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मांड की रचना हुई थी किसी दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी त्रेता युग में भगवान श्री राम ने बाली का वध कर लोगों को आतंक से मुक्ति दिलाई थी खुशी के पर्व में विजय पताका लोग अपने घरों आंगन छत पर झंडे गुड़ी पताका लगाते हैं उषा क्षीरसागर ने बताया भगवान ब्रह्मा की पूजा और महाराष्ट्र में नए वर्ष की शुरुआत पूजा अर्चना घरों में सुख समृद्धि सौभाग्य यश धन प्राप्ति हो घर के आंगन को रंगोली से सजाया जाता है आम के पत्तों तोरण दरवाजे पर बांधा जाता है सभी विश्व के लोगों को सुख वैभव शांति धन प्राप्ति हो ईश्वर से प्रार्थना करते हैं नए नया साल नए जीवन की शुरुआत करते हैं महाराष्ट्र के शिवाजी राजा ने युद्ध जीतने के बाद यह त्यौहार शुरुआत की थी महाराष्ट्र समुदाय के लोग यह त्योहार खुशी और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं आज सेक्टर 2 मैं प्रशांत कुमार शिरसागर श्री संत शिरोमणी नामदेव महाराज मंदिर कलश स्थापना आरती भजन मंगल गीत का आयोजन किया गया सभी भक्तों ने भगवान के नाम का स्मरण कर जय घोष किया पूजा के पश्चात आरती एवं महाप्रसाद का आयोजन सर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया इस अवसर पर सभी भक्तों प्रशांत कुमार क्षीरसागर उषा क्षीरसागर ओम पीयूष शिरसागर राजेश क्षीरसागर प्रहलाद शिरसागर नेहा शिरसागर अनिल शीला उ र कू डें कांता बोबडे संचय वो बड़े अखिलेश सेंद रे सिंधु सिंद रे वीणा उ र कु डै गणेश फू से सभी भक्तजन उपस्थित थे
गुड़ी पड़वा की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्रभु श्रीराम के समय में दक्षिण भारत में राजा बालि का शासन था. जब भगवान श्रीराम माता सीता की को रावण से मुक्त कराने के लिए लंका की तरफ जा रहे थे, तो दक्षिण भारत में पहुंचकर उनकी सुग्रीव से मुलाकात हुई. सुग्रीव बालि का भाई था. सुग्रीव ने श्रीराम को अपने साथ हुई नाइंसाफी और बालि के कुशासन और आतंक के बारे में बताया. इसके बाद भगवान श्रीराम ने बालि का वध लोगों को उसके आतंक से मुक्त कराया. वो दिन चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का दिन था. इसके बाद दक्षिण भारत के लोगों ने खुशी में विजय पताका फहराया और घरों में रंगोली बनाकर जश्न मनाया. तब से आज भी दक्षिण भारत में गुड़ी पड़वा के दिन गुड़ी यानी विजय पताका फहराया जाता है और इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.
ऐसे घर पर बनाएं गुड़ी
गुड़ी बनाने के लिए एक खंबे में उल्टा पीतल का बर्तन रखा जाता है, इसे गहरे रंग की रेशम की लाल, पीली या केसरिया कपड़े और फूलों की माला और अशोक के पत्तों से सजाया जाता है. इस दिन लोग सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर शरीर पर तेल लगाकर स्नान करते हैं. महिलाएं स्नान के बाद इस दौरान घर के मुख्यद्वार को आम के पत्तों और फूलों से सजाती हैं. घर के एक हिस्से में गुड़ी लगाई जाती है. फिर लोग भगवान ब्रह्मा की पूजा करते हैं और गुड़ी फहराते हैं. गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. गुड़ी को इस तरह ऊंचे स्थान पर लगाया जाता है कि इसे दूर से भी देखा जा सके. गुड़ी को समृद्धि का सूचक माना जाता है.
