एक ऐसा जनपद सदस्य जिस पर संविधान और वन विभाग के कोई भी कानून लागू नहीं होता,क्या सारे नियम कायदा कानून से ऊपर है ये रसुखदार

  • जनपद सदस्य सालो से कर रहा है वन भूमि पर अवैध कब्जा कर पोल्ट्री फार्म का संचालन ,वन विभाग के अधिकारियों का कार्रवाई के लिए फूल रहे हाथ पैर

परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद

एक बार फिर वन परिक्षेत्र छुरा अपने कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में हैं ।वन परिक्षेत्र छुरा के वन विभाग की हजारों एकड़ जमीन अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। फर्जी पट्टा वितरण एवं खड़े हुए जंगलों मे पट्टा वितरण और उसमें गिदावरी को लेकर पहले ही वन परीक्षेत्र छुरा विवादों में रहा है ।अब एक ऐसा मामला फिर सामने है जो वन विभाग के लिए अग्नि परीक्षा साबित हो रहा है। जिसमें इस बार जनपद पंचायत छुरा के एक जनपद सदस्य ने सालों से वन विभाग की बड़े झाड़ के जंगल में अवैध कब्जा कर बैठे हैं ।ग्राम झबली बाहरा के उलट पारा स्थित जलाशय के पास मे
इस अतिक्रमण की जमीन पर सालो से पोल्ट्री फार्म का संचालन करता रहा है। वन विभाग की जमीन पर हुए इस अतिक्रमण की जानकारी गरियाबंद सहित रायपुर तक के आला अधिकारी को है पर कोई भी अधिकारी आज तक कार्रवाई करने से बचते नजर आए हैं । जिस परीक्षेत्र में अतिक्रमण हुआ वहां के रेंजर साहब कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।आखिर वन विभाग कार्यवाही से झिझक क्यों रहे है और कार्रवाई से उनके हाथ कांप क्यों रहे हैं और फूल क्यों रहे हैं ? ये सबसे बड़ा सवाल है।अशोक पटेल छुरा जनपद पंचायत का एक जनपद सदस्य और वो नाम बन गया है जिसके ऊपर सविधान और भारतीय वन अधिनियम का कोई भी कानून लागू होता नजर नहीं आ रहा है।जबकि रसूखदार जनपद सदस्य एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के पद पर है।जो सवालों के घेरे में है क्योंकि इतना बड़ा अवैध अतिक्रमण के बावजूद भी झूठी जानकारी देकर जनपद का चुनाव भी जीत गया।

बता दें कि यह अवैध कब्जा कई सालों से है और अतिक्रमणकारी जनपद सदस्य द्वारा वन अधिकार पट्टा का आवेदन भी किया है, पर नियम के विपरित होने के कारण उनको पट्टा नहीं दिया जा सका।लेकिन उनके चहेते वन विभाग के लापरवाह अधिकारियों ने इन्हे वनाधिकार पट्टा दिलाने की वन विभाग के अधिकारीयो ने पूरी कोशिश की।जानकार बताते हैं कि जनपद सदस्य का कोई रिश्तेदार वन विभाग में बड़ा अधिकारी है तथा जनपद सदस्य रसूखदार होने की वजह से वन विभाग के अधिकारी के कार्रवाई के लिए पसीने छूट रहे है।ऐसे में इस प्रकार के मामलों में केवल छोटे वर्ग के लोगों पर ही वन विभाग के सारे नियम कायदे कानून लागू होते हैं पर रसूखदार और बड़े लोगों पर वन विभाग के सारे नियम लागू नहीं होते ।जिस वजह से जनपद सदस्य द्वारा वन विभाग के मुनारा को तोड़ कर अतिक्रमण किया गया और हरे भरे पहाड़ को तोड़कर दोनो भाइयो ने अतिक्रमण कर पोल्ट्री का व्यवसाय कर रहे है ।संबंधित क्षेत्र के बीड गार्ड एवं डिप्टी रेंजर का पूरा सहयोग रहा जिस वजह से टूटा हुआ मुनारा भी अधिकारी कर्मचारी को नजर नही आ रहा है। साथ ही पोल्ट्री फार्म का जितना भी कचरा है उसे भी वन भूमि में फेंका जा रहा है जिससे पर्यावरण प्रदूषण हो रहा है और जंगली जीव जंतु के ऊपर भी खतरा मंडरा रहा है।किसी भी प्रकार से कार्यवाही नही होने से जनपद सदस्य के हौसले बुलंद है।इससे साफ जाहिर है की वन विभाग के सरंक्षण में ही वन भूमि पर अवैध कब्जा का गोरखधंधा खूब फल फूल रहा है।प्रशासन की गलत नीति और लचर व्यवस्था के चलते अमीर और अमीर होते जा रहे है और गरीब और गरीब।

इस मामले को लेकर जब राजिम एसडीओ यूएस ठाकुर से चर्चा किया गया तो उन्होंने छुरा रेंजर को फोन के माध्यम से कार्यवाही के निर्देश तो जरूर दिए है।लेकिन अब देखने वाली बात ये है की वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति कितना गंभीर नजर आते है।

वर्जन

जांच की है जांच प्रतिवेदन बनाकर डीएफओ साहब को भेज दिए हैं। कुछ दिनों में नोटिस जारी होगी कार्रवाई भी किया जाएगा।

एसडी दीवान,वन परिक्षेत्र अधिकारी,छुरा

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