रोशन अवस्थी@देवभोग। देवभोग जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुंगझर के सरपंच के खिलाफ इन दिनों पंचों ने पंचायत के निर्माण कार्य में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिए हैं। पंचों ने इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए देवभोग अनु विभागीय अधिकारी से लिखित शिकायत करते हुए पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच कर तत्काल कार्यवाही करने की अपील की है ।और सरपंच श्रीमती संजू कश्यप को तत्काल पद से हटाने की मांग भी पंचों ने प्रमुखता से की है।
मुंगझर पंचायत के पंचों ने प्रमुख रूप से शिकायत में यह आरोप लगाया है कि सरपंच श्रीमती संजू कश्यप के द्वारा पंचायत प्रस्ताव में बिना पंचों की उपस्थिति में फर्जी हस्ताक्षर कर व प्रस्ताव पंजी में बिना सचिव के हस्ताक्षर कर फर्जी तरीके से पंचायत प्रस्ताव तैयार कर उच्च कार्यालय में जमा करने का आरोप भी लगाया है।
19/01/ 2021 के पंचायत प्रस्ताव में सचिव की अनुपस्थिति में सरपंच के द्वारा उप सरपंच मन्नू राम पांडे ,पंच राहुल कश्यप ,सहदेव नेताम का फर्जी हस्ताक्षर कर व फर्जी प्रस्ताव बनाकर ,नक्शा खसरा तैयार कर चेक डैम निर्माण की स्वीकृति करा कर कार्य करने की कोशिश किया गया। लेकिन कारवाही बैठक पंजी में सचिव का हस्ताक्षर ही नहीं है । उप सरपंच व कुछ पंचों का सीधा सीधा कहना है कि ये हमारे हस्ताक्षर नहीं है ।और न ही हम 19/01/ 2021 के पंचायत बैठक में उपस्थित थे। हमारा फर्जी हस्ताक्षर कर प्रस्ताव तैयार किया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि बिना सचिव की उपस्थिति में किस प्रकार से पंचायत प्रस्ताव तैयार किया गया। पंचायती राज अधिनियम की बात करें तो किसी पंचायत में शासकीय कर्मचारी सचिव ही पंचायती कार्य का संचालन करता है ।लेकिन यहां तो एक शासकीय कर्मचारी की अनुपस्थिति में सरपंच के द्वारा शासन से धोखाधड़ी कर पंचायत राज अधिनियम 1993 की धज्जियां उड़ाते हुए शासन के साथ चार सौ बीसी करने का प्रयास सरपंच के द्वारा किया गया है ।शासन से धोखाधड़ी कर फर्जी तरीके से कार्य करने के आरोप में सरपंच श्रीमती संजू कश्यप खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए अपने शिकायत पत्र मैं पंचो ने लिखा हैं। ताकि भविष्य में किसी पंचायत के सरपंच के द्वारा शासन से किसी प्रकार की धोखाधड़ी ना कर सके।
अब सवाल यह उठता है कि विभागीय अधिकारी इस तरह के चार सौ बीसी प्रकरण में स्थल व बिना सचिव के हस्ताक्षर के कार्य स्वीकृति क्यों दी ।आखिर चेक डेम निर्माण में विभागीय अधिकारी को बिना सचिव के हस्ताक्षर किए प्रस्ताव को स्वीकृति ही क्यों दी गई ।व किसी किसान के लगानी जमीन पर बिना किसान के सहमति पर व फर्जी पंचायत प्रस्ताव पर क्यों अधिकारी द्वारा मुहर लगा दी गई। इसमें जितना जिम्मेदार सरपंच है उतने ही जिम्मेदार विभाग के अधिकारी भी हैं ।इनके ऊपर भी इनके कार्य की छानबीन कर कार्रवाई होनी चाहिए ।क्योंकि चेक डेम निर्माण की as व ts नम्बर एक ही क्यों है ।यह सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हो रहा है।जबकि as व ts नम्बर किसी कार्य की अलग अलग होती हैं।इससे स्पष्ट जाहिर होता है कि विभागीय अधिकारी की घोर लापरवाही है ।क्योंकि कारवाही बैठक पंजी में सचिव के हस्ताक्षर के बिना उस कार्य को कैसे पास कर दिया गया यह सवाल उठ खड़ा होता हैं ।ऐसे अधिकारी के ऊपर भी कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। पंचो ने यह भी कहां है कि ये चार सौ बीसी का मामला है और पुलिस अधिक्षक गरियाबंद को भी जाँच के लिए आवेदन दिया गया है।
कुछ दिन पहले भी ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच के खिलाफ शिकायत की थी।
वर्जन01…सचिव अर्जुन नायक का कहना है कि पंचायत बैठक पंजी मैं मेरा हस्ताक्षर नहीं है ।न ही मेरी हेन राइटिंग हैं ।मेरी अनु उपस्थित मैं प्रस्ताव पंजी तैयार किया गया है इसमे मैं अनभिज्ञ हूँ।
वर्जन02…po नारंगे आदेश कापी देख कर बता पाऊंगा ।हमने स्थल का जाँच किया व प्रतिवेदन तैयार कर विवाद की स्थिति को दखते हुए कार्य को बंद कर दिया है।और जाँच कर गलत पाये जाने पर सरपंच के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
वर्जन03…अनुविभागीय अधिकारी देवभोग मेरे संज्ञान में मामला नहीं है। मामले की तुरंत जाँच किया जायेगा व दोषी पाये जाने पर सरपंच के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
