बघेल सरकार की उपेक्षा के कारण कृषि और किसान विकास की दौड़ में पिछड़ गये हैं,,,बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे कृषि और किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हों–राज कुमार

उतई (सतीश पारख)..हमेशा की तरह बघेल सरकार के चौथे साल के बजट में भी किसानों के लिये ऐसा कुछ नहीं हो जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिल सके और किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो सके,
राज्य में विकास की औसत वृद्धि लगभग 12% है जबकि कृषि क्षेत्र में लगभग 4% यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि बघेल सरकार की उपेक्षा के कारण कृषि और किसान विकास की दौड़ में पिछड़ गये हैं,

बिना बजटीय प्रावधान के मनरेगा मजदूरों को राज्य की ओर से 50 दिन काम देने का ढोल पीटती है

धान का 2500 रू का भाव 4 साल पहले और किसान न्याय योजना में प्रति एकड़ 9 हजार रू. की आदान राशि 3 साल पुरानी हो गई है सरकार नें कर्मचारियों का पेंशन बहाल किया, विधायक निधि की राशि को दोगुना करके 4 करोड़ रूपये कर दिया, पंच सरपंचो को भी साधने का प्रयास किया है यहां तक कि कृषि मजदूरों की राशि को भी बढ़ा दिया है लेकिन किसानों की आय में सीधे वृद्धि करने के लिये कुछ नहीं किया है ।
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच व प्रगतिशील किसान संगठन के राजकुमार गुप्ता ने उक्त बातें कही।

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