लोक निर्माण मंत्री के क्षेत्र में सड़क तो बन जाएगी..सड़क से लगे टूटे मकान कहीं खंडहर बनकर ना रह जाय..
न्यूज 24 कैरेट वेब पोर्टल प्रतिनिधि के सामने लोगों ने साझा की अपनी पीड़ा।

उतई(सतीश पारख)..लोक निर्माण मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में सड़कों का जाल बिछने से एक साल के अंदर सभी मार्गों पर फर्राटे से बिना किसी व्यवधान के गाड़ियां दौड़ेंगी जिससे उबड़ खाबड़ सड़क से लोगों को निजात मिल जाएगी।किंतु इस विकास के पीछे लोगों की पीड़ा और लोक निर्माण विभाग अधिकारियों द्वारा खेली जा रही विनाश लीला कुछ सालों बाद इतिहास के पन्नो में दफन होकर रह जाएगी। न्यूज24कैरेट के प्रतिनिधि ने आज उतई से रीसामा मार्ग चौड़ीकरण के मार्ग अंतर्गत आने वाले ग्राम बोरीगारका में प्रभावितों से मुलाकात की तथा अपनी पीड़ा साझा की। लोक निर्माण विभाग द्वारा नाली निर्माण के नाम पर आठ से दस फीट तक गढ्ढे खोद दिए जाने से जानवर सहित छोटे बच्चों व वाहन चालकों के दुर्घटना ग्रस्त होने के खतरे से लोग ज्यादा भयभीत नजर आए। बुजुर्गों ने जो बीएसपी अथवा नौकरी से सेवानिवृत्ति उपरांत अपनी सारी पूंजी लगाकर अपने बच्चों के लिए बनाए मकानों अपने सपनों को टूटता देख ज्यादा दुखी नजर आए।महिला वर्ग भी अपनी पीड़ा व्यक्त करने आगे आई तथा बताया की इस दुख की घड़ी में हमे शासन प्रशासन की ओर से कोई सहयोग मिलने की बजाय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की मनमानी और तानाशाही ने ज्यादा दुखी कर दिया है। उन्होंने बताया की राजस्व रिकार्ड में सड़क की भूमि 35 फिट है जिसका सीमांकन करवाए बिना लोक निर्माण विभाग अधिकारियों द्वारा 40 फीट और उससे भी ज्यादा तोड़ फोड़ किए जाने से लोगों में आक्रोश देखा गया। परिवारों ने बताया की दो चार पीढ़ियों पूर्व बने मकान जो हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद से हमे मिला था उसे भी बेदर्दी से लोक निर्माण विभाग अधिकारियों द्वारा बिना सीमांकन किए राजस्व व पुलिस प्रशासन का दबाव बनाकर मनमानी तरीके से तोड़ा गया। रमन सरकार में अनेक परिवारों को आबादी पट्टा मिला था उन पट्टों को भी लोक निर्माण ने नकार दिया अमान्य कर दिया।अनेक प्रकार से यू पीड़ा पहुंचाई गई मानो हमने बहुत बड़ा जुर्म किया हो।
पूर्वजों के बने अनेक मकान जो उतई मचांदूर,उतई रिसामा उतई जंजगिरी अंडा मार्ग बोरसी कोकड़ी कोड़िया उतई मार्ग पर तोड़े गए है जिनकी वर्तमान पीढ़ी जो बमुश्किल रोजी मजदूरी करके अपना व अपने परिवारों का भरण पोषण कर रही है।उनके सामने मकान के बच्चे हिस्से को सहेजने तक की स्थिति नही।आखिर ऐसे परिवारों पर गिरे वज्र से उनके परिवारों के टूटने से भी शासन प्रशासन मौन क्यों है क्या मानवता मर चुकी है या अधिकारियों को मनमानी कर लोगों को उजाड़ने की खुली छूट दे दी गई है यह चर्चा पूरे दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में जोरों पर है। लोगो का कथन है की जब मुखिया ही हमारी पीड़ा ना समझे तो हम किसके पास जाएं।इसे ही अपनी नियति मानकर लोग इस पीड़ा को सहने मजबूर नजर आ रहे।
इतना कुछ घटने के बाद भी अनेकों की आस अभी छूटी नही है ।कुछ लोगो का कहना यह भी है की देर ही सही हमारी आवाज सुनी जाएगी तथा कम से कम नुकसानी व पुनर्निर्माण हेतु शासन की ओर से हमे मुआवजा मिलेगा।ईश्वर इनकी सुन ले अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को सद्बुद्धि आए और इनके आंखों के आंसू पोछने प्रशासन आगे आए ये उम्मीद इनकी ना टूटे इनकी आस पूर्ण हो..न्यूज24 कैरेट यही मंगल कामना करता है।

