राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आई सी एफ ए आईं यूनिवर्सिटी द्वारा राष्ट्रस्तरीय वेबिनार का आयोजन संम्पन्न


विक्रम शाह ठाकुर (कुम्हारी)

कुम्हारी ।आई.सी.एफ.ए.आई. विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर के वेबिनार का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर आई सी एफ ए आई विश्वविद्यालय द्वारा “श्रीमद्भग्वत गीता की वैज्ञानिक प्रासंगिकता” विषय पर दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। वेबिनार में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यप्रकाश दुबे ने अपने उद्बोधन में बताया कि श्रीमद्भागवत गीता के अध्ययन से भारतीय संस्कृति और सभ्यता को आसानी से समझा जा सकता है । उन्होंने कहा की तकनीकी कौशल के साथ साथ मूल्यों का होना भी अत्यंत आवश्यक है । गीता का उदहारण देते हुए उन्होंने बताया कि गुरुद्रोण ने अर्जुन और अश्वत्थामा दोनों को ब्रम्हास्त्र दिया था लेकिन अश्वत्थामा को मूल्यों का ज्ञान न होने के कारण उसने इसका उपयोग विनाश के लिये किया ।
इस बेविनार के मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ) एस. पी. गौतम उपस्थित रहे । उन्होंने अपने उद्बोधन में श्रीमद्भागवत गीता के वैज्ञानिक पहलू को उल्लेखित करते हुए कहा कि जिस प्रकार तेल में जलने की क्षमता तो होती है लेकिन वह अकेले नही जल सकता एवं उसे जलने के लिये एक बत्ती और पात्र की आवश्यकता होती है, तब दीपक जल उठता है । उसी प्रकार मात्र तकनीकी ज्ञान अथवा कौशल का बिना मूल्यों के होने का कोई औचित्य नहीं हो सकता । इन बातों को प्रो. गौतम ने अत्यंत ही रोचक ढंग से समझाया इस एक दिवसीय राष्ट्रीय बेविनार में देशभर से लगभग 500 पंजीयन हुए । वेबिनार के अंत में बहुत से प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित बहुत से प्रश्नों को प्रो. गौतम के सामने रखा एवं प्रो. गौतम में सभी प्रश्नों का अत्यंत ही विवेकपूर्ण और कुशलतापूर्वक समाधान कर सभी को संतुष्ट किया । अंत में कुलसचिव डॉ रविकिरण पटनायक ने कार्यक्रम से संबंधित हर एक व्यक्ति का आभार व्यक्त किया एवं विशेष रुप से कार्यक्रम के मुख्य वक्ता को धन्यवाद देते हुए विश्वविद्यालय परिवार को हमेशा मार्गदर्शन करने आग्रह भी किया । इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे । इस पूरे कार्यक्रम का संचालन कम्प्यूटर साईंस विभाग की प्राध्यापिका श्रीमती निशा ठाकुर ने किया । विश्वविद्यालय के साइंस विभाग के डॉ. शांति स्वरुप दुबे इस कार्यक्रम के समन्यवयक थे, उन्होंने भी इस सफल आयोजन हेतु समूचे विश्वविद्यालय परिवार का धन्यवाद दिया और कार्यक्रम के समापन की घोषणा की ।

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