गुरु सेवा से मिलतें है भगवान,,

रायपुर– जो शिष्य अपने गुरु की सेवा सच्चे मन से करता है, उस पर भगवान की विशेष कृपा होती है। कभी भी गुरु को केवल मनुष्य नहीं समझना चाहिए, गुरु को भगवान की तरह पूजना चाहिए। यह संदेश बोरियाकला स्थित शंकराचार्य आश्रम में ब्रह्मचारी डा.इंदुभवानंद महाराज ने दिया

कृष्ण और सुदामा की सुनाई कथा,,,महाराज ने कहा सुदामा और भगवान श्री कृष्ण दोनों बाल सखाओं के मिलने पर भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा से पूछा कि महाराज आप पहले से ही विरक्त भावना से रहने वाले थे। आपने सदा सर्वदा गुरु महाराज की निष्ठा से सेवा की है। जो गुरु की सेवा करता है, मैं उस पर प्रसन्न हो जाता हूं। मैं वेद पाठ करने से, यज्ञ करने से, दान करने सेे तथा दीन दुखियों की सेवा करने से उतना प्रसन्न नहीं होता हूं जितना कि गुरु की सेवा करने से प्रसन्न होता हूं।

गुरु में मानुष बुद्धि, मूर्ति में पाषाण बुद्धि, और मंत्र में अक्षर बुद्धि रखने वाला शीघ्र नष्ट हो जाता है। परमहंसी गंगा आश्रम से पधारी हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्षा लक्ष्मीमणि शास्त्री ने इस अवसर पर कहा कि भगवान की कथा श्रवण करने का संकल्प करने मात्र से भगवान हृदय में आकर विराजमान हो जाते हैं।

भगवान का ह्रदय है गीता
सुदामा प्रसंग के बाद आवाहित देवताओं का पूजन हवन, कपिला तर्पण, तुलसी वर्षा तथा श्रीमदभगवत गीता का पाठ हुआ। गीता पर व्याख्यान देते हुए महाराज ने कहा कि गीता भगवान का ह्रदय है। भगवान गीता का ज्ञान देना नहीं चाह रहे थे, किंतु अर्जुन ने ऐसी स्थिति निर्मित कर दी कि भगवान को युद्ध क्षेत्र में ही गीता का उपदेश देना पड़ा। कथा सुनने कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, डीपी तिवारी एम.एल.पांडे, योगेंद्र शंकर शुक्ला, ज्ञानेश शर्मा, भूपेंद्र शर्मा, ध्रुव पांडे, नरसिंह चंद्राकर ,गौतम बाफना आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।

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