शिकायत के दो माह बाद भी जांच में रुचि नहीं दिखा रहे है वन मंडलधिकारी,अपने लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी को बचाने का कर रहे है प्रयास
परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद
गरियाबंद जिले के पांडूका वन परिक्षेत्र कार्यालय अंतर्गत सभी बीटो में वर्ष 2020-21 में हुए छिंद व खरपतवार उन्मूलन कार्य में जमकर धांधली किया गया है और महिलाओ के नाम पर फर्जी हाजरी डालकर लाखो रूपए का व्यारा न्यारा कर लिया गया है।जिसकी लिखित शिकायत गरियाबंद डीएफओ से 20 दिसंबर 2021 को कर निष्पक्ष जांच की मांग किया गया था।लेकिन आज 2 माह बीतने के बावजूद भी इस मामले पर किसी भी प्रकार जांच नही हुई है। वन विभाग में उच्च विभाग में बैठे अधिकारी द्वारा शिकायत के जांच पर रुचि नहीं दिखा रहे है और न ही समय सीमा का ध्यान रखा जा रहा है।गरियाबंद डीएफओ लोक सेवा गारंटी अधिनियम की खुलेआम धज्जी उड़ा रहा है।जबकि नियमानुसार किसी भी आवेदन और शिकायत का निर्धारित समय सीमा में निराकरण करने शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए है।उसके बाद भी एक जगह सालो से पैर जमाए यह अधिकारी जान बूझकर अपने लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों को बचाने शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।वन विभाग अनियमितता और लापरवाहियों का गढ़ बनते जा रहा है।विभिन्न विकास व निर्माण कार्यों में विभाग द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है और शासन की योजनाओं का बंदरबाट हो रहा है।वही जिले में जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का विभाग की योजनाओ में गिद्ध नजर है।जो विभाग के जनहित सारी योजनाओ को पलीता लगाने में और उसमे कमिशन के फेर में हमेशा गिद्ध नजर बनाए रखते है।तो वही लेंटाना कार्य में भारी लापरवाही बरतने वाले विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को बचाने के प्रयास में है।जिसके चलते शिकायत पर कार्यवाही तो दूर आज तक जांच टीम भी गठित नही कर पाए।विभाग के चौकीदार से लेकर डीएफओ ऑफिस तक तगड़ा सेटिंग होने की वजह से वन विभाग में कई ऐसे मामले है जंहा न तो कभी जांच होती है और न ही कभी कोई कार्यवाही और केवल खानापूर्ति के लिए योजनाएं संचालित की जाती है।बाकी सब बंदरबाट कर राशि हड़प ली जाती है।यह मामला भी ठीक उसी तरह का है।यह भी जमकर धांधली की गई है।
इस मामले को लेकर गरियाबंद डीएफओ मयंक अग्रवाल को फोन किया गया ।लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।तथा उनके व्हाटशॉप शिकायत पत्र की पावती भी भेजा गया तथा मेसेज के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास किया गया।लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं समझा।
