सतीश पारख
उतई (सतीश पारख)..दुर्ग ग्रामीण विधान सभा में क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे सरकार में दूसरे नंबर पर प्रदेश के गृह लोक निर्माण धर्मस्व पर्यटन विभाग के मंत्री ताम्रध्वज साहू के निर्वाचन क्षेत्र की एक मात्र नगर पंचायत उतई..रोज नई नई खामियों के साथ पहले नंबर पर है ..जिसका पता इस बात से ही चलता है की
छग राज्य शासन की महती योजना गढ़बो नया छत्तीसगढ़,के आधार पर हमर उतई सुंदर उतई की जो परिकल्पना जमीन पर नजर आनी चाहिए। अब तक की स्थिति में सब कुछ उसके विपरीत ही देखने को मिल रहा है वर्तमान नजारा को देखकर क्या आपको लग रहा है की उतई सरकार के दुसरे नंबर के मंत्री का निर्वाचन क्षेत्र हैं। जबकि चुनाव व सरकार को चौथा वर्ष लग चुका तथा आगामी 2023 पुनः चुनाव में जाने का वर्ष होगा। जो देखने को मिल रहा है उसमे कहीं भी शासन की परिकल्पना दिखाई नहीं दे रहा है,मोर उतई,सुंदर उतई।
शासन की निकाय की योजनाओं का लाभ उतई नगर पंचायत को जरूर मिल रहा है किंतु स्वयं की आय का श्रोत बढ़ाकर कुछ कर दिखाने का जोश किसी भी प्रतिनिधि में नजर नही आता ।इसका सबसे बड़ा कारण है राजनीतिक शून्यता जो बाधा है।धन के बल पर,और किसी के दम पर थोपे गए नगर सरकार का यही हाल होता है।राजनीति करने के लिए राजनीतिक ज्ञान होना बहुत जरूरी है,क्योंकि जिस परिवार का मुखिया ऊंची सोच रखेगा वह परिवार निश्चित ही नित नई नई सोच के दम पर बहुत कर कर गुजरने आगे रहेगा ।
जहां होगा राजनीतिक जानकार वहा का होगा पूरा पूरा उद्धार।
ये वाली कहानी चरितार्थ नही होनी चाहिए, सैय्या भए कोतवाल तो डर काहे है, जो नगर में आज तक देखने को मिल रहा है या फिर यह कहा जा सकता है की अंधेर नगरी चौपट राजा,
उतई नगर में शायद यही चल रहा है लगता है।जिस घर का मुखिया का बोलबाला होता है वहा का हर सदस्य मुखिया के बगैर बोले कोई काम नहीं करता विश्वास में लेकर काम करता है।पद में बैठ जाना अलग बात है मगर उसका निर्वहन करना बहुत बड़ी बात है।अंत में बात आती है की खुद में हो हिम्मत तो राजनीतिक चक्रव्यूह में फसो अन्यथा इससे दूर रहना ही बेहतर है,राजनीति में तरह तरह की समस्या आती है जिसका समाधान करना सबके बस की बात नही है।
और यह सब कुछ जनता के सीधे अधिकारों को छीनकर सत्ता द्वारा जबरदस्ती थोपी गई नगर सरकार में देखने सुनने व समझने को मिल रहा है।
किंतु अब क्या हो..चिड़िया चुग गई खेत यही कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है आगे भगवान ही मालिक है ।
