✍🏻 रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
छुरा:-आज से 11 साल पहले ठीक 23 जनवरी 2011 को गरियाबंद जिले के छुरा निवासी पत्रकार उमेश राजपूत का उनके ही निवास आमापारा स्थित मकान में दिनदहाड़े शाम लगभग 6:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के पश्चात पत्रकारों में काफी आक्रोश देखने को भी मिला उस दौरान इस घटना के विरोध में फिंगेश्वर छुरा, गरियाबंद, देवभोग मैनपुर अमलीपदर सहित कई नगर एक दिन के लिए बंद किये थे।
इस घटना की जांच कई वर्षों तक पुलिस विभाग ने की किंतु अपराधियों की गिरफ्तारी ना हो पाने के चलते उनके छोटे भाई परमेश्वर राजपूत ने इस घटना की जांच सीबीआई से कराने हेतु बिलासपुर उच्च न्यायालय में याचिका लगाई जिसमें घटना के 4 वर्ष बाद इस घटना की सीबीआई जांच हेतु दिल्ली सीबीआई ब्रांच को उच्च न्यायालय ने आदेश किया। किंतु आज 7 वर्ष सीबीआई जांच के बाद भी इस घटना का खुलासा नहीं हो पाया और नहीं अपराधियों की गिरफ्तारी हुई।
इस घटना में घटना के समय उमेश राजपूत के साथ उनके घर में शिव कुमार वैष्णव जो उनके पत्रकार साथी थे व उनके पुत्र उपस्थित था जिसे सीबीआई ने रिमांड पर लिया था किंतु सीबीआई के कथित तौर पर शिव कुमार वैष्णव ने सीबीआई के कस्टडी में आत्महत्या कर ली थी लेकिन शिवकुमार के परिजनों की मानें तो उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया और इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते नजर आते हैं।
इस घटना में कुछ संदेहियों का ब्रेन मेपिंग भी कराया गया था जिसकी रिपोर्ट में उमेश कुमार राजपूत की हत्या कुछ प्रभावशाली लोगों के द्वारा सुपारी देकर हत्या कराने व इस हत्याकांड में छुरा नगर के ही एक पत्रकार को उसके हत्याकांड की प्रोफाइल की जानकारी होने एवं एक राजनेता के पुत्रों के आदमियों के द्वारा उमेश राजपूत की हत्या कराने की बात सामने आई थी जिसकी सूक्ष्म जांच से खुलासा होने की बात कही गई थी।
इस हत्याकांड के बाद प्रतिवर्ष 23 जनवरी को छुरा नगर में उमेश राजपूत की श्रद्धांजलि दिवस मना कर पत्रकारों एवं उनके परिजनों के द्वारा पिछले 11 वर्षों से न्याय की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक न तो हत्यारों की गिरफ्तारी हुई और नहीं उन्हें न्याय मिल पाया, आज भी वे न्याय तंत्र की विश्वास में आशा और इंतजार में आज भी प्रतीक्षारत है कि उन्हें न्याय मिल पाए।
इस घटना में परिजनों की बीच कुछ सवाल आज भी उठते हैं,
- उमेश राजपूत के निवास में घटना के समय 5 लोग उपस्थित थे लेकिन दिनदहाड़े घटना के बाद आखिर हत्यारा कहां गायब हुआ, और उसे कोई क्यों नहीं देख पाया जबकि उमेश राजपूत का निवास शहर के बीचों बीच थाने से कुछ ही फलांग की दूरी पर रिहायशी इलाके में स्थित है।
- ब्रेन मैपिंग टेस्ट में क्लु दिखाने के बाद आखिर पुलिस उस दिशा में जांच आगे क्यों नहीं बढ़ा पाई?
- सीबीआई जांच के दौरान घटना के कई साक्ष्य जैसे उमेश राजपूत का कंप्यूटर, मोबाइल, गोली चला कपड़े का पर्दा, घटनास्थल पर मिला धमकी भरा पर्चा, थाना छुरा से गायब होने की बात पर अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं?
- ब्रेन मेपिंग रिपोर्ट की बात माने तो सीबीआई जैसे बड़ी जांच एजेंसी घटना के सात वर्षों में ऐसे कौन से प्रभावशील लोग हैं जिनके गिरेबान तक नहीं पहुंची,
ऐसी घटनाओं में त्वरित सुनवाई होते हुए कार्यवाही होनी चाहिए जिससे लोगों का कानून व्यवस्था के प्रति व न्याय तंत्र के प्रति विश्वसनीयता बनी रहे आज 11 वर्षों बाद भी अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होना और परिजनों को न्याय नहीं मिल पाना हम सबके लिए यह एक गंभीर सोचनीय विषय है।
इस मामले में असल गुनहगारो को सजा और मृत आत्मा को न्याय के लिए प्रदेश पत्रकार यूनियन छत्तीसगढ़ द्वारा महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेज कर कार्यवाही की मांग किया है गरियाबंद जिले में देवभोग ,अमलीपदर मैनपुर , छुरा , फिंगेश्वर , में 23 जनवरी को शहादत दिवस के रूप में मनाने के लिये श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर पत्रकारो द्वारा स्व. उमेश राजपूत के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रख उनकी आत्मशांति के लिए प्राथना किया गया
