खडमा धान खरीदी केंद्र में जिम्मेदार कर रहे है नियमो की अवेहलना,बिना डेनेज स्टेक निर्माण किए जमीन में लगा दिए है हजारों धान की बोरियों की छल्ली

  • नोडल साहब का गजब का स्टेट्स, अन्नदाताओ पर आरोप मढ़ते हुए दिया बेतुका बयान और कहा सवाल गलत आदमी से करोगे तो जवाब कैसे मिलेगा……

परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद

जिले के छुरा ब्लॉक अंतर्गत धान खरीदी केंद्र खडमा में जिम्मेदार और लापरवाह अधिकारियों द्वारा जानबूझकर नियमो काअवेहलना किया जा रहा है।वैसे तो जिले में धान खरीदी,रखरखाव,सुरक्षा व अन्य व्यवस्था को लेकर बड़ी बड़ी बाते तो होती है, पर असल में उस कानून कायदे और नियम का पालन धान खरीदी केंद्रों में होते नहीं दिख रहा है।इसका जीता जागता उदाहरण खरीदी केंद्रों में अव्यवस्थाओ के आलम को देखकर समझा जा सकता है।ऐसा ही हाल धान खरीदी केंद्र खडमा में देखने को मिला। जंहा पिछले दिनों हुई बारिश ने समिति प्रबंधन की सारे इंतजामो की दावों की पोल खोलकर रख दी।वही इस धान खरीदी केंद्र में एक ऐसे जिला नोडल अधिकारी को यंहा की व्यवस्था और देखरेख की दायित्व सौंपा गया है। जो ठसनबाज और अकड़बाज अधिकारी अपने आपको सारे कायदे कानून से ऊपर मानता है।यही वजह है की यहां नियम का पालन न तो करवा रहे है और न ही खुद कर रहे है। हालांकि इस मामले की जब पड़ताल की गई और अव्यवस्था को देख कर जब फड़ प्रभारी को सवाल किया गया तो उन्होंने अपना तीन माह का वेतन नहीं मिलने और फंड का रोना रोकर अपने कर्तव्य को किनारे कर दिए।

जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही, बिना डेनेज स्टेक निर्माण किए जमीन में लगवा दिए है धान की बोरियों की छल्ली

आपको बता दे की जिम्मेदारों की लापरवाही से बोरियों में रखे धान खराब होने लगा है। धान खरीदी केंद्रों में धान की बोरियो की उचित देखरेख व सुरक्षा के लिए जिन अधिकारी कर्मचारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपी है वही अपने दायित्वों के विपरीत कार्य करते नजर आ रहे है।जिसके चलते शासन को धान खरीदी केंद्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गरियाबंद जिले के आदिम जाति सहकारी सेवा समिति अंतर्गत खड़मा धान खरीदी केंद्र लापरवाही का गढ़ बन गया है। जन्हा जिम्मेदारों को शासन के कार्यों के प्रति कोई सरोकार नहीं है।इस धान खरीदी केंद्र में लापरवाही का आलम इस कदर है की बिना डेनेज स्टेक निर्माण किए हजारों धान की बोरिया को लोकल पॉलिथिन बिछाकर जमीन पर रखे है।जिससे धान की बोरियो में नमी आ रहा है और धान अंकुरित होने लगा है।वही चबूतरे में भी किसी भी प्रकार का डेनेज नही लगाया गया हैं।जबकि शासन और उच्च अधिकारियों द्वारा धान की सुरक्षा के लिए चबूतरे वाले में एक लेयर डेनेज स्टेक और बिना चबूतरे वाले में डबल लेयर डेनेज स्टेक निर्माण के साथ पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश सभी धान खरीदी केंद्रों में संबंधित अधिकारियों ,कर्मचारियों को दिया है।इसके बाद भी खडमा के जिम्मेदार फड़ ,प्रभारी और व्यवस्थापक द्वारा शासन के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए धान की हजारों बोरियो को जमीन पर रखे है।जिससे धान की बोरिया में नमी आने लगे है और धान अंकुरित हो रहे है।लेकिन जिम्मेदार लापरवाही पे लापरवाही बरत रहे है।जिसका खामियाजा शासन को उठना पड़ रहा है।

गरियाबंद जिले में धान खरीदी केंद्रों में व्यवस्था दुरुस्त रखने और मॉनिटरिंग करने कई नोडल अधिकारी जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए है पर खड़मा धान खरीदी केंद्र में जिस अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया उसकी ठसन,रौब और रुतबा देखकर व सुनकर नही लगता की साहब जी का स्टेट्स धान खरीदी केंद्र में ड्यूटी के लायक है।क्योंकि नोडल साहब जी डाक्टर सुधीर पंच भोई साहब के भी साहब है। ये ठसन बाज नोडल अधिकारी अपने आपको कलेक्टर से भी बडे अधिकारी समझते है। नोडल साहब भले ही शासन से मुंहमांगी वेतन और सारी सुख सुविधाएं ले तो रहे है पर शासन की धान खरीदी जैसे कार्यों से इन्हे कोई सरोकार नहीं है, क्योंकि साहब ठहरे शानो शौकत और फैसलेटी स्टेट्स वाले ,सरकार ने बेचारे को कन्हा धान खरीदी केंद्रों के निरीक्षण के लिए लगा दिए है जो नोडल जी को जंच नही रहा है ,जो साहब जी के वशुल के खिलाफ भी है। आइए आपको बताते है की जब नोडल साहब डाक्टर सुधीर पंच भोई से हमारे संवाददाता ने धान खरीदी केंद्र की व्यवस्था को लेकर सवाल किया तो क्या कहा नोडल अधिकारी ने उन्ही की जुबानी एक नजर….

किसान का क्या काम है , सोसायटी किसकी है,तो भाई ये सब जो है न किसानो को सोचनी चाहिए।आप देखो जैसे आप सबेरे जावोगे धान नही बिका तो क्या करोगे।आप मुझे ये पूछो की मेरा काम क्या है।मेरा काम धान सुरक्षित रूप से चले।ये बताइए की रात को 1 बजे पानी आ गया तो कौन जायेगा रात को 1 बजे।अरे भाई पत्रकार बने हो तो पत्रकार टाइप का बात करो।देखो भाई मेरी जिम्मेदारी मेरी घर की है,तो धान को मेरे घर तो नही ले जा सकता।जिम्मेदारी किसानो की है।आप ये मत भूलना की डॉक्टर सुधीर पंच भोई की जिम्मेदारी है।आप लिखो की यहा कोई सुविधा नहीं है।आप बिल्कुल लिखो सोसायटी में कोई सुविधा नहीं है।कल मै बोलकर आता हू,मेरा काम ये है।डॉक्टर पंच भोई अपने हिसाब से काम करेगा।आप मेरे को पूछो और सबको पूछो।आप किसान बनकर देखो आप धान नही खरीदेगा तो वापस ले जाओगे क्या।समझो किसान का क्या काम है।मेरा काम स्टेक बनाना थोड़ी है।मै किसको निर्देश करूंगा चलो बताओ।आपका गांव कौन सा है चलो मैं भी आऊंगा और आप भी आना 50 किसानो के सामने बात करेंगे।मेरे को जवाब देने में बूरा नहीं लगता।सवाल गलत आदमी से करोगे तो जवाब कैसा मिलेगा।मै तो उसका पक्षकार ही नहीं हु।उनसे पूछिए जो समिति का प्रबंधक है।किसान धान लेकर आता है चबूतरा है की नही ये किसको सोचना चाहिए,मुझे की उसको।मै आपको पूछ रहा हु क्या चबूतरा बनाने की जिम्मेदारी मेरी है या पूछो की बाकी जगह स्टेक बना है आपके यहा क्यों नहीं बना आप आना पूछ लेंगे।मुझे जो दिखा की यहा तराजू है , बोरा है।मेरा काम स्टेक बनाना नही है।सरकार ने नोडल अधिकारी बनाए है न,जो काम मुझे लगेगा मै वही करूंगा।

जिम्मेदार पद पर रहकर एक अधिकारी का इस तरह गैरजिम्मेदारा जवाब देना और अन्नदाताओ के ऊपर आरोप मढ़ना इस अधिकारी के कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।आखिर सरकार इन अधिकारी को सारी सुख सुविधा और अच्छी वेतन किस काम के लिए देता है।जबकि इन्हे अपने कर्तव्यों और किसानो के प्रति कोई सरकार नही है।

आखिर कौन है डॉक्टर सुधीर पंचभाई और इसके ठसनबाजी का कारण क्या है

मीडिया को अपने हिसाब से खबर छापने के लिए नसीहत देने वाले डाक्टर सुधीर पंचभाई वेटनरी डॉक्टर है जो गरियाबंद में पदस्थ है और साथ साथ ही साथ जिला के कई बड़े कार्यालयों में भी ओहदे पदो पर रह चुके है।आपको दिलचस्प बात बता दे की साहब को लंबे लंबे बात करने का गुर विरासत में मिला है।क्योंकि साहब जी कई मंत्रियों के बंगले में काम कर चुके है,तो साहब राजनीतिज्ञों के साथ रहकर उनकी भाषा सीखने में कैसे पीछे रह सकता है।क्योंकि पंचभाई जी उस माहौल में रहा है तो थोड़ा बहुत हवा तो लगेगा न जो अब उनके लफ्जो में साफ झलकने लगा है।जिले में पहले ऐसे अधिकारी है जिसे ड्यूटी से ज्यादा इसे अपने स्टेट्स की पड़ी है।

वर्जन

प्रभारी ही बता पाएंगे।मै तो बस समिति प्रबंधक हु ,घूमते रहता हु और बोल भी देता हूं।यहा व्यवस्था ठीक है। यहा लाचारी ये है की पूर्व में दो साल से लगातार घटना घटित हो चुका है।जिसके वजह से आमदनी कुछ भी नही है मतलब।वही लाचारी है और ज्यादा कुछ भी नही कह सकता।आप लोगो को तो हम लोगो से ज्यादा पता रहता है।मै आप लोगो को क्या पता पाऊंगा।फड़ बड़ा है सार्टेज के वजह से परेशानी आ रही है।आप आवोगे तो मुलाकात करना।

पवन कुमार यादव,समिति प्रबंधक,आदिम जाति सहकारी सेवा समिति खडमा

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