पाटन। भाजपा नेत्री सदस्य जिला पंचायत दुर्ग श्रीमती हर्षा लोकमनी चंद्राकर ने प्रदेश में हुए आकस्मिक भारी बारिस के बाद हुए नुकसान का जायजा लेने धान खरीदी केंद्र मर्रा का आकस्मिक निरीक्षण किया। समिति में अब तक 26804.80 क्विंटल धान खरीदा गया है जिसमे अब तक 9550 क्विंटल धान का ही परिवहन किया गया है जबकि उक्त समिति का बफर लिमिट ही 11902 क्विंटल का है और आज तक समिति में 17254.80 क्विंटल धान जाम है अर्थात 5312.80 क्विंटल धान अतिरिक्त जाम है।
श्रीमती चंद्राकर ने बताया कि सरकार की लापरवाही के चलते हजारो क्विंटल धान पानी मे भीग गया है जबकि मौसम विज्ञानियों ने दो दिन पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी थी कि बारिश होने वाली है जिसका सरकार के नुमाइंदों पर कोई असर नही हुआ और खरीदी गई धान को सुरक्षित रखने कोई खास व्यवस्था नही की गई। आनन फानन में थोड़ी बहुत तालपत्री से केवल व्यवहार निभा अपने कर्तव्य का बोध कर दिया। ये सरकार इतनी लापरवाह हो गई कि इनको मालूम है कि अगर नुकसान होता है तो भरपाई के लिए बैंक बैठी है दो तीन हजार करोड़ का कर्ज लेकर नुकसान की भरपाई की जा सकती है भले छत्तीसगढ़ की जनता कर्ज के बोझ तले दब जाय ।
श्रीमती चंद्राकर ने आगे कहा कि अधिकतर किसानों के धान भीगे हुए है अगर इन धान को तत्काल खरीदने की व्यवस्था नही की गई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा इसलिए सरकार को चाहिए कि बिना किसी लाग लपेट तत्काल किसानों की धान खरीद की व्यवस्था करें। चूंकि किसानों का धान अभी घर न पहुंच खलिहानों में ही रखा है और बारिश से भीगने के कारण पूरी तरह से खराब होने की संभवना है इसलिए किसानों को बीमा का भी लाभ मिलना चाहिए।
इधर रवि फसल में भी अधिकतर किसानों ने बुआई कर ली है खेतो में पानी भर चुका है जिससे फसल पूरी तरह से बर्बाद की स्थिति में आ गई है सरकार विभिन्न विभागों के माध्यम से खेतों का निरीक्षण करवाकर खराब हुए फसलो का किसानों को उचित मुआवजा के साथ बीमा का भी लाभ दे जिससे किसान के सामने कर्जदार बनने या भूखे मरने की स्थिति निर्मित न हो।
निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता पोसुराम निर्मलकर, खिलावन वर्मा, लोकमनी चंद्राकर मंडल अध्यक्ष उत्तर पाटन, दानेश्वर वर्मा, घनश्याम कौशिक जनपद सदस्य, कैलास यादव महामंत्री उत्तर पाटन, मोहन साहू भाजयुमो अध्यक्ष उत्तर पाटन, सियाराम मलय, एमन सिंग राजपूत , लोमश साहू, रिंकू राजपूत सहित किसान उपस्थित थे।
कांग्रेस सरकार की लापरवाही पड़ी भारी एक नवंबर से धान खरीदी होती तो नही होता नुकसान-हर्षा लोकमनी
