✍? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
छुरा:- गरीबो को अपनी खुद की आशियाना को लेकर केंद्र के कांग्रेस सरकार द्वारा इंदिरा आवास योजना की शुरुवात की गई थी जिसका नाम केंद्र सरकार की सत्ता में काबिज होने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने योजना का नाम बदल कर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह था कि प्रदेश में अति जर्जर गरीब परिवार के सपनो को पूरा करने के लिए बनाया गया था ताकि गरीब परिवार का भी खुद का पक्का मकान हो।लेकिन केंद्र में भाजपा की सरकार व राज्य में कांग्रेस सरकार के आपसी खींचातान की सजा गरीबो को भुगतना पड़ रहा है गरियाबंद जिले के ही 1500 सौ के अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को योजना की दूसरी,तीसरी,व आखिरी क़िस्त का भुगतान पिछले दो सालों से अटका हुआ है जिसके चलते गरीब परिवार के पक्के मकान के सपनो पर ग्रहण लग गया है ज्यादातर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों ने सेठ साहूकारों व दुकानदारो से निर्माण सामग्री उधार लेकर मकान का तो निर्माण करा लिया है लेकिन अब यह उधार गरीबो की गले मे फांस बनकर चुभने लगा है सेठ साहूकारों व दुकानदारों द्वारा दीये गये उधार की राशि देने व्यापारी व साहूकारों के दबाव ने गरीबो का जीना मुहाल कर दिया है लगातार उधार की वसूली को लेकर हितग्राहियों को अपने जेवर व ब्याज पर राशि लेकर सेठ साहूकारों व दुकानदारों को चुकाना पड़ रहा है।इधर प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सत्ताधारी व विपक्षी पार्टी आरोप प्रत्यारोप का खेल जारी है विपक्ष के भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा केंद्र द्वारा दी जाने वाली 60% प्रतिशत राशि बहुत पहले दी जा चुकी है। तो वही छत्तीसगढ़ की सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार को दी जाने वाली राशि रोककर बैठी है वो राशि केंद्र सरकार दे तो सबका भुगतान हो जायेगा। अब केंद्र की भाजपा सरकार व राज्य की कांग्रेस सरकार के आपसी राजनीतिक खींचतान की सजा प्रदेश के प्रधानमंत्री योजना के हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है।
