मुजगहन में संगीत मय रामकथा का आयोजन,,हजारों श्रद्धालु कथा का कर रहे रसपान,,

देवरीबंगला / ग्राम मुजगहन में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान कथावक्ता कनिष्ठ जगतगुरु शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व हिंदू जागरण परिषद , राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास अयोध्या ) ने कहा कि चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ ने विचार किया राजपाट उसको सौंप देना चाहिए अब प्रभु राम भाई सब लायक और जब संतान लायक हो जाए तब राजपाट सोपकर ,तपस्या के लिए चला जाना चाहिए। चक्रवर्ती सम्राट ने यह निर्णय तो लिया परंतु इस पर उन्हें एक बार गुरुदेव वशिष्ठ से अवश्य पूछना था। पुत्र पाने के बाद चक्रवर्ती सम्राट दशरथ भूल गए की संतान की प्राप्ति गुरु कृपा से हुई थी। इसका परिणाम यह निकला गुरुदेव के यहां संदेशा भेजा गया कि कल राम का राजतिलक है। गुरुदेव वशिष्ठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अभी राजतिलक का कोई उचित समय नहीं है। सुदिन सुमंगल ताहि दिन ,जब राम होही युवराज अर्थात अभी राजा बनने का योग नहीं है। गुरु की अवहेलना के कारण चक्रवर्ती सम्राट के इस निर्णय से केकई कुपित हो गई और केकई ने इस निर्णय को बदल दिया। अपने दिए हुए दो वरदान मांग लिए पहला वरदान मांगा उन्होंने मेरे पुत्र भरत को राजा बनाए, दूसरा वरदान राम का 14 वर्ष का वनवास हो। दोनों वरदान दशरथ जी के लिए असहनीय थे। अर्थात गुरु अवहेलना और परमात्मा के द्वारा दिए हुए कृपा का उल्लंघन करना मृत्यु का कारण बन जाता है।
आगे पूज्य महाराज श्री ने केवट के प्रसंग को बताया कि ,संसार को देने वाला ब्रह्म जब एक निषाद के सामने खड़ा हो गया” मांगी नाव न केवट आना, कहा कि तुम्हारे मरम में जाना” संसार में बड़ा वह होता है ,जो देता है। छोटा होता है ,जो मांगता है। आज ब्रह्म ने अपने ही जीव को बडाई देने के लिए संसार के सामने मांगना शुरू किया। अब केवट की महानता थी कि केवट ने बारंबार कहा प्रभु आप यह क्या कर रहे हैं, तो परमात्मा राम ने कहा केवट यह समय का चक्र होता है” कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े “
आज तुम्हारे नाम के बगैर मैं उस पार नहीं आ सकता ।केवट ने अपनी शर्त रख दी कि प्रभु जिस चरणों की रज से अहिल्या का उद्धार हुआ था ।जब तक मैं उन चरणों की रज को अपने कठौती पर नहीं धोउंगा ।अपने पूर्वजों के उद्धार करने के लिए तब तक मैं तुम्हें नाव से पार नहीं कर सकता हूं। क्योंकि संसार को भगवान के दरवाजे पर जाना पड़ता है ।अब मैं भाग्यशाली हूं कि आज भगवान मेंरे दरवाजे पर है। इसलिए मैं पूरे परिवार का उद्धार करना चाहता हूं। यही राष्ट्र और समाज के लिए प्रेरणा है ,कि जब परमात्मा को प्राप्त करना हो आवश्यक नहीं है। केवल आप चिंतन करें। परमात्मा आपकी चिंता करेगा। एक दिन आप की चिंताओं को दूर करने के लिए स्वयं चलकर आए दरवाजे तक भगवान आ जाएगा। शंकराचार्य स्वामी आत्मानंद सरस्वती जी ने बेटियों पर बोलते हुए बताया कि,”यत्र नारी पूज्यंते रमंते तत्र देवता”
जहां नारियों का सम्मान होगा, वहां देवताओं का वास होगा। राष्ट्र में कन्याओं का सम्मान नहीं रहेगा तो राष्ट्र का कल्याण कैसे होगा। कन्या विश्व पूज्य होती है। भगवान परशुराम और भगवान राम ने भी इसको शास्त्रों में बारंबार कहा है क्योंकि कन्या सर्व शक्ति होती है। हमारे शास्त्रों में दुर्गा की पूजा होती है। हमारे शास्त्रों में नौ देवियों की पूजा होती है। हमें कन्याओं का सम्मान करना चाहिए और कन्या भ्रूण हत्या से देश और विश्व में कुल गांव पड़ रहा है इसकी रक्षा करना चाहिएं। कन्या न होती न संसार होता जगत में किसी का ना इतिहास होता यदि प्रभु राम या कृष्ण का धरातल पर अवतार हुआ होता। उसके पहले माता कौशल्या और देवकी का अवतार हुआ है। राम ने रावण का वध किया वही शक्ति सीता मे समाहित थी। माता सीता का अभिनय संसार में ना हुआ होता तो सीताराम की जोड़ी विश्व में पूजी नही जाती। राम अधूरे होते ,इसलिए नारी का सम्मान ही सर्वोपरि है। श्रीराम कथा का आयोजन 18 दिसंबर तक चलेगा।

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