बेमेतरा जि.पं. सभापति राहुल टिकरिहा ने मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र कुम्हारी धान खरीदी केंद्र का किया निरीक्षण…
बारदाने पर भेद-भाव दुःखद:- मुख्यमंत्री गृह जिला दुर्ग व रायपुर में बारदाने हेतु किसानों को है छूट बाकी जिलों में 25 से 50 फीसदी बारदानों की मांग…
प्रदेश धान खरीदी में किसानों से बारदाने माँग की नियम का बेमेतरा जिला पंचायत सभापति ने जो खुलासा किया है वो चौकाने वाला है। उन्होंने बताया कि एक ओर प्रदेश के बेमेतरा जिला के अलावा अन्य सभी जिलों में किसानों से 25 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक बारदाने (बोरा) की मांग की जा रही है। वहीं भेदभाव रूप से दुर्ग व रायपुर जिला जो की मुख्यमंत्री जी का गृह जिला है यहाँ पर 100 फीसदी बारदाने शासन स्वयं प्रदाय कर रही है। सभापति राहुल ने भूपेश सरकार पर ऐसी नीति को लेकर कहाँ की यह सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही हैं। किसानों के साथ ऐसा भेद भाव दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं अन्य जिलों में खरीदी का समय जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, बारदाना संकट गहराता जा रहा है। कभी 25 तो कभी 50 फीसदी बारदाने की माँग से किसान लगातार परेशान हो रहे है।
प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के सोशल मीडिया प्रभारी राहुल योगराज टिकरिहा ने प्रदेश कांग्रेस सरकार पर धान खरीदी अव्यवस्था को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई तबसे किसानों का हाल बेहाल हो गया है। धान बोवाई से लेकर बेचाई तक किसानों को कांग्रेस सरकार ने परेशान कर दिया है। नकली बीज, खाद के बाद अब बारदाना संकट प्रदेश सरकार के किसान विरोधी नीति को दर्शाता है।
किसान हर वर्ष कहाँ से लाएगा बारदाना?
सभापति टिकरिहा ने कहा कि किसानों का काम फसल उगाना है, बारदाना बनाना नहीं है। जब सरकार स्वयं बारदाने की व्यवस्था नहीं कर पा रही है तो किसान हर साल कहाँ से करेंगे। पिछले वर्ष भी किसानों से बारदाना लिया गया था, जिसका पैसा आज तक जारी नहीं हुआ है। जब किसान सरकार को बारदाने का पैसा दे सकता है, तो वही पैसा जुट कंपनी को देकर बारदाना क्यों नहीं बनवाता है। जबकि बारदाना संकट पिछले वर्ष भी हुआ था।
प्रदेश सरकार किसानों के साथ कर रही भेदभाव
जिला पंचायत सभापति टिकरिहा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिला दुर्ग और निवास जिला रायपुर में किसानों को धान बेचने के लिए 100% बारदाना दिया जा रहा है, लेकिन बाकी जिले के किसानों को बारदाने लाने के लिए कहा जा रहा है। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के गृह जिला बेमेतरा में भी धीरे-धीरे बारदाना संकट गहरा रहा है।
किसान महंगे दामों में खरीद रहे है बारदाना, मिलेगा सिर्फ 25 रुपया
किसानों के मजबूरी का फायदा सरकार के साथ-साथ व्यापारीगण भी उठा रहे है। कभी महंगे दाम में खाद-दवाई, नकली बीज तो कभी अधिक दामों में बारदाना बेचकर उठा रहे है। आज किसान बारदाने की खोज में भटक रहे है। किसानों को बारदाने के लिए कालाबाजारी और भ्रष्टाचार का भी शिकार होना पड़ रहा है जहाँ उन्हें 35 से लेकर 50 रुपये तक में बारदाने खरीदने पड़ रहे है और सरकार किसानों को बारदाने के एवज में केवल 25 रुपये दे रहे है।
