लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। जनपद पंचायत गरियाबंद के अध्यक्ष द्वारा बिना सामान्य सभा में प्रस्ताव किये ही जनपद पंचायत को प्राप्त हुई शासकीय राशि को बंदरबाट किया गया हैं। त्रिस्तरीय पंचायती राज अधिनियम में बनाये गये नियमों का खुला उलंघन करते हुये बिना बहुमत के तानाशाही रवैये से कार्य किया गया है। पिछले सामान्य सभा बैठक में कुल 24 एजेंडा पर चर्चा होना था, किंतु उक्त एजेंडा को दरकिनार कर जो एजेंडा में शामिल नहीं था वित्तीय संबंधी निर्माण कार्य का स्वीकृति अपने मनमर्जी से कर दिया गया, जिसमें सदस्यों द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया, फिर भी सदस्यों के बिना सहमति एवं प्रस्ताव के बिना एजेंडा में लिये गये वित्तीय मामलों से जुड़ा हुआ कार्य को पुरष्कार के रूप में प्राप्त हुई राशि 25 लाख रुपये का नियम विरुध्द व्यय किया गया है।इसी प्रकार तेरहवें वित्त आयोग मद की पूर्व में स्वीकृत विभिन्न निर्माण कार्यों की राशि 40 लाख रूपये जो जनपद पंचायत गरियाबंद में शेष था, जिसे बिना एजेंडा में लिये बिना सहमति बिना प्रस्ताव के अपने मनमर्जी से योजना का नाम को छुपाकर तदार्थ के तहत इतनी बड़ी रकम 40 लाख को आठ पंचायतों में सी.सी. रोड निर्माण हेतु पांच पांच लाख रूपये का नियम विरुद्ध स्वीकृति दे दी गयी है। यह कि सामान्य सभा बैठक में उपाध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों द्वारा नियम विरुद्ध किये गये कार्यों का जानकारी चाही गयी तो अध्यक्ष महोदया लालिमा ठाकुर द्वारा तानाशाही रवैया से उपस्थित जनपद सदस्यों बात किया और कहा कि मेरे अनुमति के बिना किसी सदस्यों को बोलने का अधिकार नहीं है, मैं चाहूं तो एजेंडा में रहे या न रहे, मैं किसी भी कार्य को करा सकती हूँ ऐसा कहकर त्रिस्तरीय पंचायती राज अधिनियम में किये गये प्रावधानों का खुला उलंघन कर अपना मनमानी चलाने का प्रयास किया गया है। वही जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष प्रवीण यादव व अन्य जनपद पंचायत सदस्यों के द्वारा कलेक्टर व जिला पंचायत के सीईओ को ज्ञापन दिया गया। जनपद पंचायत के सदस्यों अध्यक्ष द्वारा की गयी मनमानी एवं नियम विरूध्द भुगतान की गयी राशि की जांच टीम गठित कर समुचित जांच कर वसूली कराने की मांग की गई। वही कोई भी कार्यवाही नही होने पर जनपद पंचायत कार्यालय में उग्र आंदोलन किये जाने की बात कही गई। जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।
