आपदा को बनाया अवसर, जिला शिक्षा विभाग का कारनामा,,,,स्कूलों के लिए खरीदी गई करोड़ों रुपए की सामाग्री अब तक नहीं बंट पाई ,,मामले ने पकड़ा तूल, प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी

लोकेश्वर सिन्हा

गरियाबंद । जिला शिक्षा विभाग में व्यापक पैमाने पर स्कूलों की सामाग्री खरीदी में गड़बड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। करोड़ों रुपए के गुणवत्ताहीन सामाग्री की खरीदी की गई है। यह खरीदे गए सामाग्री वर्तमान में स्कूलों में बंट नहीं पाए हैं। गरियाबंद जब से जिला बना है, उसके बाद से जिला शिक्षा विभाग में लगातार घटिया सामाग्री खरीदी कर भ्रष्टाचार किए जाने की खबरें लगातार मिल रही है। जिसको लेकर जिले में अफसर भी बेपरवाह हैं। जबकि कायदे से खरीदे गए सामाग्रियों का भौतिक सत्यापन किए जाने चाहिए थे, लेकिन भ्रष्टाचार एवं कमीशनखोरी के कारण लगातार गुणवत्ताहीन सामाग्री की खरीदी की जा रही है।
कोरोनाकाल के दौरान जब स्कूल बंद थे, तब इन सामाग्रियों की खरीदी की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों के लिए लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपए के ग्रीन ब्लेक बोर्ड और संकुलों में फर्नीचर 68 लाख रुपए के खरीदे गए हैं। वहीं लाखों रुपए के व्यायाम सामाग्री की भी खरीदी हुई है। इन खरीदे गए सामाग्रियों को लेकर सूत्रों ने दावा किया है कि जमकर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी कर शासन को चुना लगाया गया है। बताया तो यहां तक जाता है कि सीएसआइडीसी के माध्यम से खरीदी होनी चाहिए, इसका भी पालन किया गया है कि नहीं यह भी जांच का विषय हो सकता है। इसके अलावा बिना प्रशासनिक स्वीकृति के ख़रीदी की गई है। इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि जिला प्रशासन ने प्रशासनिक स्वीकृति दी है कि नहीं इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि सामाग्री खरीदी को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति जिला के मुखिया से लेना पड़ता है। जानकारी तो यहां तक मिली है कि ग्रीन बोर्ड सहित खरीदे गए सामाग्री गरियाबंद, मैनपुर और राजिम में पड़े हुए हैं। सामाग्री नहीं बांटे जाने की भी पुख्ता जानकारी मिली है। देखा जाए तो शिक्षा के क्षेत्र में शासन-प्रशासन गंभीर है, इसी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता सहित छात्रों को सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से अनेक योजना लागू है। लिहाजा इन योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिसकी वजह से जिला शिक्षा विभाग सुर्खियों में आ गया है।
असपको बता दे कि 
जिला शिक्षा विभाग द्वारा कोरोनाकाल में खरीदी किए सामाग्री मामले ने प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ लिया है, जिसकी जांच चल रही है। लेकिन इस मामले की जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। आखिर यहां का प्रशासन इस मामले की जांच कब तक पूरी करेगा, जांच कहां तक पहुंची है, इस पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। जानकार ताज्जुब होगा कि नए सप्लाई किए गए ग्रीन बोर्ड स्कूलों तक पहुंचने के पूर्व ही खराब हो चुके हैं। इससे तय है कि शासन को करोड़ो रूपए का चूना लगाया गया है। लेकिन अब इसके दोषी कौन हैं, यह भी तय नही हो पाया है। जांच रिपोर्ट कहां तक पहुंची है पता लगाने का प्रयास किया गया लेकिन विभाग सहित जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी भी जानकारी से अनभिज्ञ हैं।
  विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार
बताया जाता है कि यहां पदस्थ दो बाबू के कारनामें चर्चा में हैं। जिनके इशारे में ही सामाग्री खरीदी कार्यों में गड़बड़ी की गई है। दोनों शासकीय कर्मचारी इसी जिले के निवासी हैं। जानकारों के मुताबिक सामाग्री खरीदी में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के चलते इन दोनों कर्मचारियों के बेनामी संपत्ति खरीदी किए जाने की भी जमकर चर्चा है। यह भी प्रशासनिक जांच का विषय हो सकता है। कोरोनाकाल के दौरान अनेक शासकीय कर्मचारियों की असमय मौत हुई है। यहां के एक जिम्मेदार कर्मचारी ने मृतक के परिजनों को अनुकंपा नौकरी के आदेश देने के साथ ही इनसे मोटी रकम तक वसूल कर ली है। इससे यह प्रतीत होता है कि कितना बेरहम जिले के स्कूल प्रशासन में ऐसे कर्मचारी तैनात हैं जो मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान न रखते हुए अपनी जेब गरम करने में लगे हैं। अनुकंपा नियुक्ति के लिए बकायदा जिला प्रशासन में कमेटी बनी है, लेकिन जिला शिक्षा विभाग की अनुकंपा नियुक्ति बिना भेंट पूजा के संपन्न नहीं हुई है। 
जिला शिक्षा अधिकारी करमन खटकर ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है। कलेक्टर साहब इसकी जांच करवा रहे हैं। खरीदी में गड़बड़ी हुई है कि नहीं इस सवाल पर कहा कि मेरे कार्यकाल के नहीं है, इसलिए मुझे इसकी जानकारी नहीं है। इसकी जांच कब तक पूरी होगी इसको लेकर भी उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही है।

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