परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। जिले में रेत की अवैध खुदाई व परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।खनन माफियाओं द्वारा दिन और रात चैन माउंटेन से अवैध खुदाई कर नदी नालो का सीना छलनी किया जा रहा है।लेकिन जिम्मेदार विभागीय अधिकारी जान कर भी अनजान बने हुए है।
बता दे की जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी में बिरोड़ा के सूखा नदी और छुरा ब्लाक के आखिरी छोर में स्थित नागझर में एनजीटी के सारे नियमो की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए खनन माफियाओं द्वारा सूखा नदी में अवैध रूप से दिन रात चैन माउंटेन से रेत की खुदाई व परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है।जबकि यहां किसी भी प्रकार से रेत खदान की स्वीकृति नहीं है।उसके बावजूद भी खनन माफियाओं द्वारा बेखौफ रेत की अवैध खुदाई बेरोकटोक किया जा रहा है।खनन माफियाओं द्वारा दिन रात चैन माउंटेन से रेत की खुदाई करे और विभाग को खबर न हो ,ऐसा हो ही नहीं सकता?जिस तरह से जिले में अवैध रेत खदान चल रहे है और उस पर कार्यवाही नहीं हो रही है,उससे तो ऐसा लगने लगा है कि खनिज विभाग के साहब जी इन अवैध खदानों के कंही ठेकेदार तो नहीं है?जिसके सरंक्षण में खनन माफियाओं का अवैध कारोबार खूब फल फूल रहा है।जिसके चलते नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सारे नियमो के विपरित खुदाई होने से नदी नालों के अस्तित्व के साथ साथ पर्यावरण पर संकट गहराने लगा है।लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मुंहमांगे तनख्वाह और सारी सुविधाएं शासन से लेते है और वफादारी रेत के चोरों की कर रहे है।जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों की गैरजिम्मेदाराना कार्य और अपने कर्त्तव्यो के विपरित कार्य और विभागीय देखरेख के चलते जिले मे प्राकृतिक खनिज संपदाओं की प्रचुर मात्रा में दोहन और लूट लगातार जारी है है।जिससे पर्यावरणीय संकट मंडरा रहा है।लेकिन इस ओर न तो उच्च अधिकारियों को ध्यान है और न ही किसी जनप्रतिनिधि और नेताओं को कोई सरोकार है।

जीवनदायनी नदियों का अस्तित्व पर मंडरा रहा है खतरा
छत्तीसगढ़ में नदी नालों का स्वरूप पूजनीय एवं जीवनदायनी है और ग्रामीण अंचलों में अधिकतर ग्रामीणों की जीवकोपार्जन का जरिया होता था,पर कांग्रेस सरकार के गठन होते ही उनके नुमाइंदे कार्यकर्ता एंव सरकार के संरक्षण में पिछले 50 वर्षों में नदी नालों का दोहन नहीं हुआ वह महज ढाई वर्षों के कार्यकाल में लूट लिया गया।इसको लेकर वर्तमान सत्तधारी सरकार गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है ,साथ ही रेत के अवैध कारोबार में हर व्यक्ति अपने आपको मुख्यमंत्री निवास,गृह मंत्री निवास सहित जिले के बड़े अधिकारी का दोस्त होने का दबदबा दिखाने से भी बाज नहीं आते और न ही किसी प्रकार के कायदे कानून का भय है।
सरकार की नई नीति से अवैध खनन का बढ़ रहा है ग्राफ
ज्ञात रहे कि नई सरकार के गठन बाद ग्राम पंचायतों से खदान संचालन जारी करने की शक्ति वापस लिए जाने के बाद छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम के अंतर्गत इलेक्ट्रानिक निविदा के माध्यम से उत्खनन पट्टा आबंटित किया गया है। छत्तीसगढ़ की प्रदेश सरकार एक ओर रेत खदानों में अवैध खनन रोकने नियमानुसार नीलामी के माध्यम से रेत खदानों का आबंटन कर रही है।तो दूसरी ओर जिले के बिरोडा, नागझर और कूटेना , तर्रा खदान में चैनमाउंटेन मशीनों से दिन रात अवैध रूप से रेत खनन का कार्य किया जा रहा है।जबकि नियमनुसार अभी तक इन खदानों की किसी भी प्रकार से स्वीकृति नहीं हुई है।रायपुर और दुर्ग भिलाई क्षेत्र के खनन माफियाओं द्वारा जिले में प्रवेश कर अपनी राजनीतिक पकड़ का खूब फायदा उठा रहे है और दबंगई पूर्ण अवैध रूप से रेत की खुदाई करने पर उतारू हो गए है।जिसके चलते शासन को लाखो करोड़ो रुपए की राजस्व की हानी तो हो ही रही है साथ ही उनके अधिकारियों कि लापरवाहियों की वजह से शासन की छबि भी धूमिल होता नजर आ रहा है।
बता दे कि भारत सरकार वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की नोटिफिकेशन एवं इसमे किए गए संशोधनों के अनुसार रेत खदानों में खदान संचालन के लिए दी गई पर्यावरणीय अनापत्ति में यह शर्त होती है कि, रेत का खनन मानव श्रम से किया जाए जिसमे मशीनों से रेत उत्खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध है। रेत उत्खनन में ठेकेदार राष्ट्रीय हरित न्यायालय एनजीटी के आदेश की बेखौफ धज्जिायां उड़ा रहा है।
मशीनों से रेत उत्खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध होने के बावजूद जिले के रेत खदान में एनजीटी के नियमो की खुलेआम धज्जिायां उड़ाई जा रही है। ठेकेदार के द्वारा चैन माउंटेन मशीनों से रेत उत्खनन किया जा रहा है। ठेकेदार का चैन माउंटेन मशीन बेखौफ नदीयो का सीना छलनी कर रहा है। रेत खदान संचालनकर्ता को खनिज रेत का मूल्य एवं अन्य प्रभारित करों को खदान क्षेत्र में आम जनता के लिये प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है लेकिन जिले के कोई भी रेत खदान में वर्तमान व्यवस्था को दरकिनार किया जा रहा है।
प्रदेश की सरकार नई व्यवस्था से नदियों एवं जल स्रोतों के पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संरक्षण के साथ ही उपभोक्ताओं को सुगमता से उचित मूल्य पर रेत उपलब्ध कराना चाहती है पर उदासीन खनिज विभाग व ठेकेदार की मनमानी से पर्यावरणीय नुकसान हो रहा और रेत की कीमतें आसमान भी छू रही है।
वर्जन.1
मै अभी दशगात्र कार्यक्रम में आया हूं ।अभी इस बारे में कुछ भी नहीं बोल सकता।बाद में बात करता हूं।
फागू राम नागेश,जिला खनिज अधिकारी ,गरियाबंद
वर्जन .3
मंत्री महोदय के कार्यक्रम की तैयारी मै व्यस्त हू।दिखवाता हूं,बिल्कुल कार्यवाही होगा।
घनश्याम जंघेल,तहसीलदार फिंगेश्वर
वहीं इस मामले को लेकर खनिज निरीक्षक मृदुल गुहा को दो बार फोन किया गया ।लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
