लोकेश्वर सिन्हा
गरियबन्द —-छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ के गरियाबंद जिला इकाई ने अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर दफ्तर पहुंचे और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में अपनी मांगो में राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा है कि शासन की महत्वकांक्षी योजना जैसें समर्थन मूल्य में धान खरीदी, राशन वितरण, अल्पकालीन ऋण वितरण, गोधन न्याय योजना इत्यादि कार्यों को प्रदेश के 2058 सहकारी समितियों में 30-40 वर्षों से अल्प वेतन पर कार्यरत सहायक कर्मचारियों द्वारा प्रदेश के लाखों किसानो की सेवा पूर्ण निष्ठा के साथ की जा रही हैं ।
खरीफ वर्ष में धान खरीदी नीति एवं त्रिपक्षीय अनुबंध में धान उठाव हेतु निर्धारित किये गये समयावधि में संपूर्ण का परिवहन नही होने से सुखत व प्रासंगिक सुरक्षा व्यय और कमीशन कम मिलने के कारण धान खरीदी वरदान के बजाय अभिशाप हो गई हैं । कर्मचारियों को सम्मान जनक वेतन व सुविधा देने समितियों में पर्याप्त राशि भी नहीं हैं । वहीं कई कर्मचारियों को कई महिनो से वेतन भी अप्राप्त है । इस कारण संघ द्वारा धान खरीदी कार्य का बहिष्कार करते हुए असहयोग आंदोलन करने का निर्णय लिया गया हैं ।
समितियों का समय पर ब्याज अनुदान नही मिलने व धान खरीदी कमीशन नही मिलने से खरीफ वर्ष 2021-22 धान खरीदी तैयारी हेतु राशि नहीं हैं । प्रांतीय संगठन द्वारा लंबित 5 सूत्रीय मांगो की पूर्ति हेतु पूरे प्रदेश के कर्मचारियों द्वारा 9 दिनों तक अनिश्चित कालीन आंदोलन करते हुए विधान सभा का घेराव कर छ.ग. शासन का ध्यानाकर्षण कराया गया था । फलस्वरूप विधान सभा सत्र मे धान खरीदी मे सुखत सहित अन्य मुद्दो पर चर्चा होने के उपरांत छ.ग. शासन ने सहकारिता विभाग एवं खाद्य विभाग के संयुक्त उप मंत्री मंण्डल की कमेटी की बैठक में प्रांतीय संगठन के पदाधिकारीयों को आमंत्रित कर 5 सूत्रीय मांगो पर सकारात्मक चर्चा कर पहल करने का आश्वासन भी दिया गया था । किन्तु अब तक मांग पूरी नहीं किए जाने के चलते कर्मचारी महासंघ द्वारा प्रशासन का पुनः ध्यान आकर्षित किया जा रहा है।
