रुक्मिणी मंगल कथा का श्रवण करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं.- पंडित त्रिभुवन महाराज

छुरा।  छुरा के मानस भवन सभगार में चल रही संगीतमय  तमय श्रीमद् भावगत महापुराण अमृत वर्षा में गुरुवार को 

को रुक्मिणी विवाह उत्सव मनाया गया।  ने बताया कि इस अवसर पर विवाह उत्सव की सजीव झांकियां सजाई गईं। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के वरमाला प्रसंग के दौरान सुनाए गए कर्णप्रिय भजनों पर भक्तों ने भाव विभोर होकर नृत्य किया।

श्रीमद् भागवत कथा में व्यासपीठ पर विराजमान पंडितत्रिभुवन महाराज जी ने गीत, महारास, रुक्मिणी मंगल विवाह एवं प्रेम योग के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए महारास के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महारास का अर्थ जीव से जीव का मिलन नहीं अपितु ब्रह्म से जीव के मिलन को महारास कहा गया है। रुक्मिणी मंगल कथा के बारे में बताते हुए कहा कि जो इसका श्रवण करता है, उसके घर में विवाह की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं और परिवार मंगलमय जीवन व्यतीत करता है। संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में सजी रुक्मिणी विवाह उत्सव की झांकी और भाव विभोर होकर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया।
परायण कर्ता मानस मन्दिर के पुजारी पण्डित यज्ञेश प्रसाद पाण्डेय है उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम छुरा नगर के वरिष्ठ जन व परिजनों द्वारा पितरों के निमित्त सामूहिक रूप में करवा रहे है। कार्यक्रम में श्रीमती काजल प्रहलाद पटेल, श्रीमती शकुन्तला रेकचंद देवांगन,श्रीमती रधिकाओंप्रकाश यादव श्रीमती संतोषी यशवंत यादव, तेजस्वी यादव, जगदीश प्रसाद देवांगन,सैलेंद्रदिक्षित,मनोज चंद्राकर,हरीश यादव,कुंदन यादव, राजेश यादव, खूबचंद चंद्राकर, फुलकुवर यादव, उषा बाईं साहू, श्रीमती गंगा पुरोहित, मीना यादव, द्रोपदी दीवान, सागर साहू,  हरीश,महेश शंकर सचदेव उनके परिवाजनों व नगर के वरिष्ठ जन माताएं ,बहने श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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