इंजीनियर परिश्रम और दृढ़ संकल्प का पर्याय है – डॉ. आनंद महलवार


छुरा………विश्व के सबसे महान इंजीनियर और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्म दिवस पर आईएसबीएम विश्वविद्यालय द्वारा त्रिदिवसीय ‘अभियंता दिवस’ कार्यक्रम 13 से 15 सितम्बर तक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में हमारे इंजीनियरों के योगदानों को याद करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आनंद महलवार ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की छायाप्रति की पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उन्होंने कार्यक्रम के अंतिम दिन ‘अभियंता दिवस’ पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इंजीनियर परिश्रम और दृढ़ संकल्प के पर्याय हैं। मानव प्रगति उनके अभिनव उत्साह के बिना अधूरी होगी उनके महत्वपूर्ण योगदानों को याद करना आवश्यक है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बी पी भोल ने कहा कि अभियंता दिवस पर, मैं अपने मेहनती इंजीनियरों को बधाई देता हूं और उनकी निपुणता के साथ-साथ समर्पण की सराहना करता हूं। राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इंजीनियरिंग के प्राध्यापक चंद्रशेखर कुर्रे ने कहा कि इंजीनियर विज्ञान और समाज के बीच इंटरफेस पर काम करते हैं। इंजीनियरों को समस्याएं हल करना पसंद है। यदि कोई समस्या आती है तो वे उन्हें हल करने के लिए कई तरीके विकसित करते हैं। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण यादव ने कहा कि विश्वेश्वरैया एक प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। उन्होंने जिस ब्लॉक सिस्टम का आविष्कार किया वह पानी के व्यर्थ बहाव को रोकने के लिए स्वचालित दरवाजे, पानी की आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था की योजना बनाई थी जिसके कारण दुनिया भर के इंजीनियरों से उन्हें प्रशंसा मिली।उनके योगदानों को कार्यक्रम के माध्यम से याद करना तथा प्रेरणा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। ततपश्चात अकादमिक प्रमुख डॉ. एन के स्वामी ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि हम सभी किसी न किसी रूप में इंजीनियर हैं। उन्होंने सभी इंजीनियरिंग के छात्रों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. भूपेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन इंजीनियरिंग की छात्रा ऋचा श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी संकायों के विभागाध्यक्ष, समस्त प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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