दुर्ग। केंद्र के समान 28% महंगाई भत्ते की किश्त दिये जाने की मांग को लेकर 8 अगस्त को छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आव्हान पर न्याय सभा प्रतिकात्मक अनशन का आयोजन बुढ़ा तालाब रायपुर में हुआ। छत्तीसगढ़ इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक कालेज राजपत्रित अधिकारी संघ की ओर से डॉ अजय त्रिपाठी, दीपक पटेल, हुसैन उल्ला खान, देवसिंह साहू एवं स्वप्निल चौबे प्रतिनिधि मंडल के रूप में उपस्थित हुए। प्रतिनिधि मंडल ने, फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा से मुलाकात कर, फेडरेशन को एसोसिएशन की ओर से पूर्ण समर्थन देने की बात कर कंधे से कंधा मिलाकर चलने कि बात कही। प्रतिनिधि मंडल ने फेडरेशन के प्रवक्ता विजय कुमार झा से मिलकर भी समर्थन देने का वादा किया। संघ के प्रांताध्यक्ष शंकर वराठे ने बताया कि पदाधिकारियों एवं सदस्यों से हुए विचार विमर्श के बाद न्याय सभा में प्रतीकात्मक अनशन हेतु पदाधिकारी एवं सदस्य द्वारा भाग लेंगे का निर्णय हुआ था।न्याय सभा का कारण 28% महंगाई भत्ता है जो केंद्र के बाद उत्तराखंड, राजस्थान व पंजाब सरकारों द्वारा मंहगाई भत्ते की घोषणा कर दी, परंतु अभी तक राज्य में बढ़े हुए मंहगाई भत्ते की घोषना नहीं हुई। प्रदेश के लाखों कर्मचारी अपने आपकों छला महसूस कर रहे है। फेडरेशन ने 7 अगस्त तक मंहगाई भत्ता घोषित करने हेतु राज्य सरकार को अल्टीमेटम दिया है। यदि 7 अगस्त तक धोषणा नहीं की जाती है, तो 8 अगस्त को रायपुर राजधानी के बूढ़ातालाब में एक दिवसीय धरना देकर शासन का ध्यान आकृष्ट करने का निर्णय लिया है। पूर्व में छग.कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के द्वारा कलम रख-मसाल उठा आंदोलन का आह्वान किया था। तीन चरणों के बाद चौथे चरण में रायपुर राजधानी में रविवार 8 अगस्त को एक दिवसीय न्याय सभा प्रतिकात्मक अनशन आन्दोलन किया जावेगा। ताकि प्रदेश के शासकीय सेवको व पेंशनरों को देय 01 जुलाई 2019 से लंबित मंहगाई भत्ते की 4 किश्तें जो क्रमश: 01 जनवरी 2020, 01 जुलाई 2020 तथा 01 जनवरी 2021 को केन्द्र सरकार व तद्पश्चात अनेक राज्य सरकारों के द्वारा जारी करने के बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य के कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। केन्द्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों में व्याप्त भेदभाव की नीति का परिणाम है कि केन्द्रीय कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता बढ़कर 17 से 28 प्रतिशत् हो गया है। जबकि छत्तीसगढ़ राज्य के शासकीय सेवकों व पेंशनरों को 01 जनवरी 2019 से मात्र 12 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है। राज्य के कर्मचारी केन्द्रीय कर्मचारियों से 16 प्रतिशत् पीछे हो गए है। प्रदेश के कर्मचारी 01 जुलाई 2019 से 01 जनवरी 2021 तक विगत् दो वर्षो से मंहगाई भत्ता से वंचित है। इसके कारण प्रतिमाह के वेतन में 4-5 हजार रुपए आर्थिक क्षति हो रही है। जब राज्य में मंहगाई एक, बाजार एक, मूल्य एक फिर केन्द्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों में मंहगाई भत्ता भेंदभाव क्यों किया जाता है।

