भारत सरकार का ऐतिहासिक फैसला से हजारों छात्रों को मिलेगा लाभ:- रुपसिंग साहू

✍? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद रूपसिंग साहू सामाजिक कार्यकर्ता एवं कार्यकारी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ रायपुर संभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के 1 साल होने पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए 27 फ़ीसदी एवं 10 फ़ीसदी आरक्षण गरीबों के लिए स्वागत योग्य बताया केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला से हजारों छात्रों को मिलेगा लाभ यह सोच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य पिछड़ा वर्ग और गरीब तबके विद्यार्थियों को एक बार फिर से तोहफा दिया है इसी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया जाएगा हर साल ऑल इंडिया कोटा स्कीम (एआईक्यू) के तहत एमबीबीएस एमएस बीडीएस एमडीएस डेंटल मेडिकल और डिप्लोमा में 5550 कैंडीडेट्स को आरक्षण की नई व्यवस्था का फायदा मिलेगा ऑल इंडिया कोटा स्कीम 1986 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत शुरू की गई थी इसका उद्देश्य दूसरा राज्य के स्टूडेंट को अन्य राज्य में आरक्षण का लाभ उठाने में सक्षम बनाना था साल 2008 तक ऑल इंडिया कोटा स्कीम में अनुसूचित जाति के लिए 15% और अनुसूचित जनजाति के लिए 75 परसेंट आरक्षण की शुरुआत की थी अब इससे ओबीसी व ईडब्ल्यूएस भी शामिल हो गए हैं इससे पहले मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से जुड़े ऑल इंडिया कोटे में ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया जा रहा था 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण देने के लिए एक संवैधानिक संशोधन किया गया था इसके मुताबिक मेडिकल कॉलेज और डेंटल कॉलेज में सीट बढ़ाई गई है ताकि अनारक्षित वर्ग पर भी इसका कोई असर न पड़े बेशक यह केंद्र सरकार का महती योजना का फैसला है आरक्षण नौकरी से अधिक जरूरी है शिक्षा संस्थानों में सामाजिक असमानता दूर करने की दिशा में अगर हमें बढ़ना है तो पिछड़े तब को अधिक से अधिक शैक्षिक अवसर देने से फायदा होगा लेकिन इसके जरिए अगर पिछड़ापन दूर होता है तो यह अच्छी बात है या मेडिकल शिक्षा तक सीमित ना हो इसलिए भारत देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के ऐतिहासिक फैसला से इंजीनियरिंग सूचना प्रौद्योगिकी सभी तकनीक हवाई स्किल शिक्षा पाठ्यक्रमों के संस्थानों में प्रवेश के स्तर पर भी बढ़ाया जाना चाहिए शिक्षा का पूरा स्वरूप बदल जाएगा और उससे परंपरागत शिक्षा पाठ्यक्रम आउटडेटेड हो गए हैं अब नई स्किल बेस्ड नौकरियां है स्वरोजगार है इसलिए हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था पाठ्यक्रम व संस्थान बदलने चाहिए देश में जितने भी यूनिवर्सिटी है कॉलेज हैं तकनीकी शिक्षण संस्थान हैं उनमें नई इंडस्ट्री नए जरूरतों के हिसाब से कोर्स डिजाइन किए जाने चाहिए नई शिक्षा नीति के 1 साल होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बड़े ऐलान किए पहला विद्या प्रवेश प्रोग्राम के जरिए गांव में भी बच्चे को प्ले स्कूल की सुविधा मिलेगी अब तक यह कॉन्सेप्ट शहरों तक सीमित है दूसरा इंजीनियरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में ट्रांसलेशन के लिए टूल डेवलप किया गया है यह शैक्षिक बदलाव की दिशा में अहम कदम है देश में हमारे समूची शैक्षिक व्यवस्था व पाठ्यक्रमों को एक राष्ट्रीय स्वरूप देना जरूरी है नई शिक्षा नीति में 3 से 18 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए 5+3+3+4 डिजाइन वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संरचना अच्छी बात है ‌

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