लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद
गरियाबंद जिले के फिगेश्वर, गरियाबंद और छुरा ब्लाक से है जहां उत्तरप्रदेश के निवासी आशुतोष श्रीवास एवं गायत्री साहू नामक महिला जो अपने आप को रायपुर निवासी बताया और सरगम सहेली नामक एनजीओ की संचालिका होने का दावा किया जो कि बकायदा इनोवा लग्जरी वीआईपी कार से ग्रामीणांचलों में रायपुर से आते है। और भोले-भाले ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के नाम पर अगरबत्ती, रूई बत्ती, मेहंदी, बिंदी बनाने एवं कच्चा माल देकर पक्का माल तैयार करने का कार्य बता कर तैयार माल को नगद खरीदकर ले जाने बात कर ग्रामीणों को अपने झांसे में ले लिए। गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास के द्वारा ठगी का शिकार हुए पिड़ित ओमप्रकाश यादव, चम्पा साहू,भामा साहू, हेमबाई नेताम, शोभा ध्रुव, मीना ने बताया कि किस तरह गायत्री साहू नामक महिला और आशुतोष श्रीवास जो कि राजिम एक्सीस बैंक में काम करता था उन दोनों ने उन्हें कैसे अपने झांसे में लिया और राजिम ऐक्सिस बैंक में काम करने वाले आशुतोष श्रीवास एवं गायत्री साहू ने सरगम सहेली अपने संस्था के बारे में बताया कि सरगम सहेली समूह जो कि नाबार्ड के माध्यम से महिलाओं को घर बैठे काम देंगे। और उसके बदले सम्मान जनक मेहताना देंगे। ये सब लोक लुभावन बातें महिलाओं को बताया गया। तो गांव के महिलाएं जो कि कोरोना काल में बेरोजगारी की मार झेल रहे थे। उन दोनों के साथ काम करने को तैयार हो गई घर बैठे काम और अच्छा मेहताना मिलेगा करके अब इसके बाद शुरू हुआ लोगों को ठगने का काम, समूहों का निर्माण और राशि एकत्र करने का काम ग्रामीण अंचल के भोले-भाले महिला को सरगम सहेली नाम से समूह बनाने एवं प्रत्येक समूह में 10 – 20 सदस्य बनाने और प्रत्येक समूह के प्रत्येक सदस्य से 500 रूपये पंजीयन करने के नाम पर और बीमा के नाम से 500 रूपए प्रत्येक सदस्य से लेने के लिए बोला गया प्रत्येक समूह से पिड़ित लोगों को 500 रूपये कमीशन समूह बनाने वाले को देने की बात की गई। इस तरह से एक महिला समूह से 10 से 20 हजार रूपए जमा करवाया गया। समूह का गठन गरियाबंद जिले का छुरा, राजिम, फिंगेश्वर ब्लाक के विभिन्न ग्रामों में पिडित महिलाओं ने अपने घर परिवार सहित अन्य महिलाओं को समूह में जोड़कर रखा। और लगभग 100 महिला समूह का गठन किया गया जिसका अनुमानित राशि 15 से 20 लाख रूपए है। पिड़ित महिलाएं जो कि ठगी का शिकार हुई है। उनके पास पैसे लेने के लिए गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास अलग-अलग दिन में अलग-अलग जगहों पर पहुंची और बकायदा कुछ पैसे को ले लिए है करके हस्ताक्षर करके रशीद के रूप में दिए। महिलाओं ने बताया कि पैसा को गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास ने स्वयं आकर लिया और कुछ पैसे खाते में डलवाने के लिए बोला जिस पर क्षेत्र की भोली भाली महिलाएं रोजगार के लालच में उनके झांसे में आकर समूह गठित कर राशी नगद एवं खाते में ट्रांसफर कर दिया। तत्पश्चात शातिर दिमाग की गायत्री साहू ने सबूतों को मिटाने के लिए बकायदा जिस रजिस्टर पर समूह का नाम और अन्य जानकारी था। पिड़ित महिलाओं को झांसा देकर सब दस्तावेज लेकर फरार हो गई। समूह गठित हो चुकी ग्रामीण अंचलों की महिलाओं ने जब काम मांग किया तो उन्हें झांसा देते रहे की आज काम देंगे कल काम देंगे। समूह के महिलाओं के द्वारा जब पिड़ित लोगों के घरों में आकर काम या पैसा का मांग किया गया। तब पिड़ित महिलाओं के द्वारा गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास से फोन पर संपर्क किया गया। जिस पर गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास ने महिलाओं को उल्टा धमकीं देते हुए। जावो जो कर लो करके धमकाया गया। कुछ दिनों के पश्चात फोन नं को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया। और अन्य नंबर पर जवाब नहीं दिया जाता है। गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास जिन्होंने रायपुर राजधानी में विधानसभा रोड पर सरगम सहेली संस्थान का कार्यलय होने का दावा किया था। कार्यालय का और गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास का पता करने जब पिड़ित महिलाएं रायपुर पहुंची तो वहां मौजूदा स्थिति में कोई कार्यलय नहीं मिला। अपने साथ हूए धोखाधड़ी और ठगी का जानकारी होने पर पिड़ित महिलाएं जिन्हें अच्छा वेतन और रोजगार का लालच गायत्री साहू एवं आशुतोष श्रीवास के द्वारा दिया गया था। वो इस ठगी के पश्चात गरियाबंद जिला मुख्यालय पहुंची। जहां गरियाबंद जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर से मिलकर अपनी साथ हुई ठगी को विस्तार पूर्वक बताये और पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई जिस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक भोजराज पटेल को देने के पश्चात पिड़ित महिलाएं को न्याय के साथ दोषियों के ऊपर कार्यवाही की मांग किया गया।
