देवभोग क्षेत्र केन्दुबंद से डूमरबाहाल मार्ग बरसात के कारण कीचड़ से हुआ लथपथ राहगीरों को आवाजाही में हो राहा है परेशानी सुध लेने वाला कोई भी नही

✍? संवाददाता तेनसिह मरकाम गरियाबंद

केन्दुबन से डुमरबाहाल मार्ग 
बरसात के  पानी के कारण किचड़ से लथपथ पड़ा हुआ  है अौर यह मार्ग  5 गांव के हजारों ग्रामीणों का आवाजाही करने वाले मार्ग है 
लेकिन इस मार्ग  में भारी मात्रा से कीचड़ होने के कारण आवाजाही करने वाले राहगीरों आवाजाही करने के लिए डर रहे हैं और इस मार्ग कीचड़ होने के कारण उन्हें 25 किलोमीटर की दूरी तय कर देवभोग मुख्यालय दूसरे मार्ग पर  आवाजाही करना पड़ रहा  है 
 मिली जानकारी के अनुसार केन्दूबंद से डूमरबाहाल मार्ग कीचड़ से लथपथ होने के कारण  उक्त सड़क की आवाजाही नहीं होने के चलते  पांच गांवों के हजारों ग्रामीणों को  25 किलोमीटर की दूरी सफर तय किया जाता है उक्त केंन्दुबंद से डूमरबाहाल   मार्ग विगत कई वर्षों से खराब है लेकिन इस मार्ग को सुध लेने वाला ना विभागीय है ना तो जनप्रतिनिधि जबकि इस मार्ग में हजारों ग्रामीणों की आवाजाही करते हैं सबसे लाजमी बात तो यह है कि उक्त मार्ग से गुजर कर 50 से भी अधिक विद्यार्थी स्कूल जाते हैं लेकिन जिम्मेदारों के अनदेखी के चलते राहगीरों को आए दिन परेशानी झेलना पड़ती है गौरतलब हो कि भूपेश सरकार के किए गए वादे ग्रामीण स्तर पर आज भी अनदेखी किया जा रहा है जिसके चलते आवाजाही करने वाले  इन सड़क चलते राहगीरों को परेशानी होना पड़ता है  कहीं ना कहीं स्थानीय प्रशासन की भी अनदेखी नजर आ रही है अगर स्थानीय प्रशासन इसे अनदेखी ना करता तो इन 5 गांव के हजारों ग्रामीणों को 25 किलोमीटर की दूरी तय कर देवभोग मुख्यालय पहुंचना नहीं पड़ता 
जब इस आवाजाही करने वाले राहगीर से बात की तो राहगीरों का कहना है 
इस मार्ग की समस्या के बारे में ग्राम सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराएं हैं लेकिन इनके द्वारा केवल अश्वासन  देकर बात को टाल दिया जाता है 
 जबकि सरकार द्वारा ग्राम सरकार को ऐसी परेशानी का समाधान करने को कई प्रकार की राशि जारी की जाती है जिससे कि ग्रामीणों को ऐसी समस्या का सामना करना न पड़े जनप्रतिनिधि का कार्य होता है कि ग्रामीणों को हो रही समस्या को दूर कर समस्या का समाधान करें लेकिन वर्षों से चली आ रही इस मार्ग इस समस्या के बाद ऐसे लगता है कि ग्राम सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि कुंभकरणी निद्रा में सोए हुए हैं 
अब  देखना यह होगा कि इस खबर के बाद बरसात में हो रही आवाजाही की समस्या से इन 5 गांव के हजारों ग्रामीणों को कब निजात मिलती है वह कितने दिनों में जिम्मेदार इसकी सुध लेते हैं

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